शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहरों में एक टाउन हाल भवन की भी नगर निगम प्रशासन को कोई परवाह नहीं। निगम अधिकारियों के संरक्षण में यहां अरसे से चल रहा एक और बड़ा खेल सामने आया है। सामान्य आवंटन कराकर टाउनहाल मैदान के व्यावसायिक इस्तेमाल का घपला करने वाले निगम अधिकारियों और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने दो मंजिले टाउनहाल भवन को भी अरसे से अपने कब्जे में ले रखा है। यह सब कुछ खुले तौर पर सबकी आंखों के सामने है, बावजूद इसके नगर निगम प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। करीब डेढ़ दशक से हालात ऐसे हैं कि लोग अब टाउनहाल भवन में आने-जाने से भी कतराते हैं।
नगर निगम के अफसरों और ठेकेदारों के सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं, टाउनहाल का घपला उसकी एक बानगी है। जानकारों के मुताबिक टाउनहाल को राजा विजयानगरम् ने दान में दिया था। खेल के मैदान और दो मंजिले भवन के साथ इसमें लाइब्रेरी की भी व्यवस्था थी। ताकि बच्चे और युवा खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ सकें। गरीब परिवारों की शादियां और सांस्कृतिक गतिविधियां हो सकें। लेकिन नगर निगम के अफसरों और ठेकेदारों के सिंडिकेट ने डेढ़ दशक से पूरे टाउनहाल का बंटाधार कर रखा है।
शहर के बेहद महत्वपूर्ण प्वाइंट पर स्थित टाउनहाल के दो मंजिले भवन के ऊपरी तल पर दो कमरे और एक बड़ा हाल है। एक कमरे में लाइब्रेरी है, जिस पर ताला पड़ चुका है जबकि दूसरे कमरे में एक संस्था ने कार्यालय खोल रखा है। हाल खाली है लेकिन आम लोग उसकी बुकिंग नहीं करा पाते हैं। अलबत्ता, संस्था की ओर से छोटे-बड़े आयोजन यहां कभी कभार कराए जाते हैं। चार कमरे नीचे हैं। यहां नगर निगम ने वार्ड आफिस खोल रखा है।
टाउनहाल की लाइब्रेरी नाममात्र की रह गई है। लंबे समय से उसका ताला तक नहीं खुला है। उसमें न तो अब किताबें आती हैं और न ही समाचार पत्र। पहले की जो किताबें हैं उनका भी कोई पुरसाहाल नहीं रह गया है।