श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना को विनाशकारी बताते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगाने की अपील करते हुए ऐसा न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
पीएम को भेजे पत्र में स्वामी स्वरूपानंद ने कहा है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत किए जा रहे विस्तारीकरण में काशी खंडोक्त मंदिरों को गिराया जा रहा है।
गंगा और काशी विश्वनाथ मंदिर के बीच गंगा पाथवे बनाने का यह प्रोजेक्ट विनाशकारी है। गंगा को बचाने की बजाय गंगा पाथवे बनाकर काशी के मूलस्वरूप को नष्ट किया जा रहा है। इसे तत्काल न रोका गया तो सनातन धर्मी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
गौरतलब है कि कॉरिडोर योजना के विरोध में स्थानीय दुकानदार और कई धर्माचार्य खड़े हो गए हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर को सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर विश्वनाथ कॉरिडोर नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।
2017 अप्रैल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर से गलियों से होकर ललिता घाट तक जाने वाले 700 मीटर के रास्ते को कॉरिडोर के रूप में बदलने की तैयारी है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि प्राचीन काल के मंदिरों, इमारतों को तोड़कर कॉरिडोर विकसित करना शास्त्रसम्मत नहीं है। इससे काशी का संत समाज आहत है। उनका कहना है कि कॉरिडोर के नाम पर कई पौराणिक मंदिर तोड़ दिए गए। उनमें ऐसे मंदिर शामिल हैं, जो पंचकोशी यात्रा में आते हैं। इनका जिक्र काशी खंड में है।