नाद ब्रह्म के उपासक पद्मविभूषण पं. किशन महाराज की 99वीं जयंती पर जन्मशताब्दी समारोह का श्रीगणेश हुआ। देश भर में वर्ष पर्यंत चलने वाले आयोजन की शुरुआत सरस्वती कक्ष सभागार में मां सरस्वती के चरणों में सुर, लय और ताल की मनमोहक जुगलबंदी से हुई। संगीत प्रेमियों ने तबला सम्राट को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
कबीर चौरा स्थित सरस्वती कक्ष में शनिवार को जन्मशताब्दी समारोह की प्रथम प्रस्तुति प्रवीण उद्धव और उनके पुत्र श्रुतिशील उद्धव के युगल तबला वादन से हुआ। गायन पर मृणाल रंजन और हारमोनियम पर प्रेम रंजन ने संगत की।
दूसरे कार्यक्रम में देवाशीष डे ने मंच संभाला। राग सरस्वती में विलंबित रचना एकताल में निबद्ध नाथ कैसे गज के फंद छुड़ाए...और द्रुत रचना तीनताल में लंगरवा ढीठ मानत नाही...सुनाकर पं. किशन महाराज को स्वरांजलि दी। गायन में जयंतिका डे और शुभंकर डे ने साथ दिया। तबले पर नंदकिशोर मिश्र और हारमोनियम पर पंकज मिश्र ने संगत की।
तीसरे कार्यक्रम में विशाल कृष्ण ने कथक की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। उठान, तोड़ा, परन, तिहाई, टुकड़े, बंदिश से मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर कुशाल कृष्ण, गायन और हारमोनियम पर संतोष मिश्रा व सितार पर नीरज मिश्रा ने संगत की। धन्यवाद ज्ञापन अंजली मिश्रा और संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित जी के चित्र पर उनके पुत्र पंडित पूरण महाराज, पुत्री अंजली मिश्रा, मुख्य अतिथि रेवती अय्यर, विशिष्ठ अतिथि आरती सिन्हा, नाती अमरेंद्र मिश्र, गगन मिश्र, राजेश जैन, शिवम मिश्रा, कन्हैया लाल मिश्र, उदय राव ने पुष्पांजलि अर्पित की।