राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रविंद्र जायसवाल ने कहा कि राजर्षि की परंपराओं को फिर से स्थापित करने की जरूरत है। खेल और शिक्षा दोनों ही इस कॉलेज की पहचान रहे हैं, जिसे नए रूप में अपनाने की जरूरत है। छात्रों व शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं को सजोते हुए नए युग में प्रवेश करें और देश एवं समाज की सेवा करें।
वह शनिवार को उदय प्रताप कॉलेज के संस्थापक राजर्षि उदय प्रताप सिंह जूदेव की 172वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। राजर्षि सभागार में विशिष्ट अतिथि माता वैष्णो विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान से जानकारी नहीं रखनी चाहिए, उन्हें अपने आसपास का ज्ञान रखना होगा। उदय प्रताप शिक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने कहा कि कॉलेज प्रबंधन कॉलेज के विकास के लिए सदैव तत्पर है। भविष्य में अनेक रोजगारपरक विषयों की शुरुआत की जाएगी।
शुभारंभ राजर्षि को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने मंगलाचरण, कुलगीत, रानी मुरार कुमार बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना, उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। प्राचीन छात्र प्रो. मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले 50 साल में पूरी दुनिया में राजर्षि की परंपराओं और अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ेंगे। इस दौरान कुलपति प्रो. एके त्यागी, न्यायमूर्ति एसके सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. डीके सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने किया। संचालन डॉ. अलका रानी गुप्ता, ज्ञान प्रभा सिंह एवं अंकिता मिश्रा ने किया। इस दौरान डॉ. मंजुला श्रीवास्तव, डॉ. अमन गुप्ता, संगीता कुमार, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह एवं डॉ. गोरखनाथ उपस्थित रहे।
छात्रों ने किया विरोध, नारेबाजी
वाराणसी। राजर्षि की जयंती समारोह पर छात्रसंघ पदाधिकारियों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया। छात्र नेताओं ने कहा कि महाविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक कोई प्रगति नहीं हुई। छात्रों द्वारा अचानक नारेबाजी से कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति रही। शिक्षकों ने किसी तरह से उन्हें समझाबुझाकर शांत कराया। ब्यूरो