द्वारका शारदा एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि राममंदिर सरकारें नहीं बनाएंगी।
इसका निर्माण संत, धर्माचार्य और शंकराचार्य करेंगे।
बुधवार को काशी प्रवास पर आए शंकराचार्य ने कहा कि तीर-धनुष लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तस्वीर दिखाकर अयोध्या में मंदिर बनाने की बात की जाती है।
जबकि, वहां भगवान राम का जन्म हुआ था और इस नाते वहां बाल राम यानी रामलला ही विद्यमान होंगे।
वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकारों से मुखातिब शंकराचार्य ने नोटबंदी पर कहा कि आतंकवाद, नकली नोट, भ्रष्टाचार और कालाधन समाप्त करने के दावे के साथ यह कदम उठाया गया था लेकिन इन सब पर कोई अंकुश नहीं लगा। उल्टी गंगा बहाई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो कहते हैं कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है, तो यहां क्यों आए?
गंगा ने बुलाया है तो गंगोत्री जाना चाहिए था। गंगोत्री से काशी के बीच कई बांध और नाले हैं।
जिन्होंने गंगा की धारा को रोकने के साथ ही उसे प्रदूषित कर रखा है।
कहा कि दलीय राजनीति ने लोगों को जाति और धर्म के खांचों में बांट रखा है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
यह भी कहा कि ज्योतिष पीठ की लड़ाई संपत्ति की लड़ाई नहीं है। शंकराचार्य पद पर योग्य व्यक्ति की लड़ाई है। प्रतिपक्ष इसे लंबा खींच रहा है।