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UP News: मठ में शीश महल और स्वीमिंग पुल को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी सफाई, कही ये बात

Thu, 26 Feb 2026 04:11 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सही तरीके से जांचत हो तो कोई समस्या नहीं है, लेकिन पुलिस ने शिकायतकर्ता को हर जगह शामिल किया है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीविद्यामठ में बृहस्पतिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से बात की। मठ में शीश महल और स्वीमिंग पुल होने की बात पर उन्होंने सफाई दी। कहा कि ये बातें मौका देख कर कही जा रही हैं, इस समय जिसके मन में जो खुन्नस है वो निकाला जा रहा है। सच्चाई ये है कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के द्वारा अपने गुरुजी की इच्छा को पूरा करने के लिए श्रीविद्यामठ का निर्माण कराया गया था। इसका निर्माण वर्ष 1995 में हुआ है। उसके बाद से ये मठ लोक कल्याण के लिए निरंतर चलता आ रहा है। 

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शंकराचार्य ने कहा कि मठ के पांच मंजिला होने की जो बात है, ये जेब में रखकर छिपाने की चीज नहीं है। शीशमहल होना ये अच्छाई है कि बुराई है। अगर कमरे में शीशा लगा है, पारदर्शी है जिससे कोई अंदर झांककर देख सकता है तो ये तो आश्रम के लिए अच्छाई है। यहां पर कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। स्वीमिंग पुल की बात है कि हमारे गुरुजी का स्वास्थ्य खराब होने के चलते वो कहीं गिर न जाएं, इस वजह से गड्ढा बनाया गया था, जिसमें वे व्यायाम कर सकें।     

कहा कि जहां तक बात मठ में किसी को घुसने नहीं दिए जाने की है तो यहां छोटे- छोटे बच्चे हैं, जो पढ़ाई करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे और मोबाइल के साथ किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन बिना कैमरे के कोई कहीं भी जा सकता है। 
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेल दाखिल करने की बात पर कहा कि हम एक संस्था हैं, हम का मतलब केवल अविमुक्तेश्वरानंद नहीं है। इस समय हम मठ हैं। इसे संरक्षित करने के लिए बेल दाखिल की गई। क्या पता गिरफ्तार करके जेल ले जाकर वहां जहर की सुई लगा दी तो?

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