बीएचयू के खगोल विज्ञानी प्रो. अभय कुमार ने कहा कि आसमान में ये नजारे ध्रुवीय इलाकों या फिर लद्दाख जैसी ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर नजर आते हैं। अब मैदानी इलाकों में भी अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा है। भीषण गर्मी के बीच ऊंचाई पर घने बादल बने हुए हैं। ऊपरी सतह पर पानी से टकराने के बाद ही इस तरह का गोल छल्ला बनता है।
बीएचयू के खगोल विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने कहा कि वायुमंडल में धूल के साथ ही कुछ चमकीले कण भी पहुंच गए हैं। अमोनिया, कैल्शियम और राख में ऐसे कण होते हैं, जो प्रकाश का परावर्तन करते हैं। सूरज की किरणें इनसे टकराकर परावर्तित हो रही हैं। इसी वजह से सूरज के चारों ओर रिंग जैसी आकृति दिखी।