कंदवा के गणेश फुटबाल मैदान पर गुरुवार को संगीतमय राम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को सुदर्शन महाराज ने कहा कि हम सनातनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।
पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से तमाम विसंगतियां घेर रही हैं। इससे समाज को बचाने की जरूरत है। उन्होंने संस्कृति और संस्कारों की रक्षा पर जोर दिया।
सुदर्शन महाराज ने कहा कि भगवान राम ने जिन आदश मूल्यों की स्थापना की, वह पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय है। राम के जैसा जीवन हो जाए तो दुनिया बदलने में देर नहीं लगेगी।
उन्होंने समाज को शिक्षित बनाने के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत बताई। कहा कि भारतीय संस्कृति को आज दुनिया भर के लोग समझने में जुटे हैं, जबकि हम खुद पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
इससे बचने की जरूरत है। इससे पहले बाबा विश्वनाथ और संकट मोचन की आराधना की गई। संगीतमय वंदना के दौरान श्रद्धालु झूमने लगे।
संकट से मुझको बचाना पवनसुत... और वृंदावन की कुंज गली में... जैसे भजनों के बोल पर भक्त खूब थिरके। कथा सुनने के लिए सैकड़ों की तादाद में लोग पहुंचे थे।