दाहिने पैर की फिबुला हड्डी से बना नया जबड़ा
इस जटिल शल्यक्रिया में मरीज के ट्यूमर से प्रभावित निचले जबड़े को पूरी तरह निकाला गया। फिर दाहिने पैर की फिबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया गया। माइक्रोवैस्कुलर तकनीक से फिबुला की धमनियों को गर्दन की धमनियों से जोड़कर रक्त संचार स्थापित किया गया। इस प्रक्रिया को माइक्रोवैस्कुलर फ्री फिबुला फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी कहा जाता है।
सामान्य हो गई चेहरे की बनावट
ऑपरेशन के बाद मरीज के चेहरे की बनावट सामान्य हो गई है। उसे सामाजिक रूप से आत्मविश्वास वापस मिला है और वह मानसिक रूप से काफी खुश है। उसके पैर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं है। वह सामान्य रूप से चल-फिर रहा है। दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. एच.सी. बरनवाल ने इस सफल शल्यप्रक्रिया के लिए पूरी चिकित्सक टीम को शुभकामनाएं दीं।