‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: स्थिति एवं संभावनाएं’ विषय पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में शनिवार को व्याख्यान होगा। विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष अशोक सिंघल की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में देश भर से लोग जुटेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विहिप के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विष्णु सदाशिव कोकजे करेंगे। मुख्य वक्ता अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी होंगे। इनके अलावा विहिप के उपाध्याक्ष चंपत राय भी शामिल होंगे।
व्याख्यान से एक दिन पहले शुक्रवार को विहिप की बैठक हिंदू भवन में होगी। जिसमें 25 नवंबर को अयोध्या में जाने वाले कार्यकर्ताओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी। सूत्रों की मानें तो काशी से साधु संतों के साथ तकरीबन 2500 लोग जाएंगे। बस, ट्रेन व अपने साधन से अयोध्या पहुंचेंगे।
उसी दिन दिल्ली में पांच लाख, अयोध्या में एक लाख लोग, नागपुर में 50 हजार और बंगलूरू में 25 हजार लोग सरकार से राम मंदिर निर्माण कराने की मांग करेंगे। काशी से भी कई साधु संत डमरू, ढोलक, झाल और मजीरा के साथ नाचते गाते जाएंगे।
अयोध्या की धर्मसभा में बनेगी राममंदिर निर्माण की रणनीति
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राम मंदिर मामले को अपनी प्राथमिकता से इतर बताया जाना और बिना फाइल देखे ही तीन माह की तारीख दे दिया जाना देश के 100 करोड़ हिंदुओं की जनभावना से खिलवाड़ है। अयोध्या में 25 नवंबर को आयोजित धर्मसभा में मंदिर निर्माण की रणनीति बनेगी। यह बातें विश्व हिंदू परिषद के सह प्रांत संगठन मंत्री राजेश ने प्रेसवार्ता के दौरान कही। वे आजमगढ़ के ठंडी सड़क स्थित जिलाध्यक्ष रामकृष्ण मिश्र के आवास पर मीडिया से रूबरू हो रहे थे।
उन्होंने कहा कि मंदिर प्रकरण की डे-टू-डे सुनवाई होनी थी लेकिन नए मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को अपनी प्राथमिकता से ही इतर बता दिया है। राम मंदिर का मुकदमा सर्वोच्च न्यायालय में सबसे पुराना है। इसके बाद भी इसे पेडिंग रखा जा रहा है। हिंदू समाज को राममंदिर निर्माण के लिए जागृत करने के उद्देश्य को लेकर विश्व हिंदू परिषद पूरे देश में चार स्थानों अयोध्या, दिल्ली, बेंगलूरू और नागपुर में 25 नवंबर को धर्मसभा आयोजित कर रहा है।
पूर्वांचल वासियों के लिए धर्मसभा अयोध्या में आयोजित है। इसमें पूर्वांचल के दो लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की प्राथमिकता में समलैंगिकता, हिंदू संस्कृति को समाप्त करने का कानून बनाना शामिल है लेकिन हिंदुओं के आराध्य भगवान राम की जन्मभूमि पर उनके मंदिर बनाने का प्रकरण प्राथमिकता में नहीं है।
धर्म सभाओं के माध्यम से केंद्र सरकार से यह मांग की जाएगी कि अब सोमनाथ की तरह अयोध्या में भी राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या की धर्मसभा के बाद जिला, तहसील व ब्लॉक स्तर पर भी ऐसी धर्मसभाएं आयोजित की जाएगी।