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फिरोज खान की नियुक्ति पर चढ़ा सियासी पारा, सुब्रमण्यम स्वामी बोले- मुस्लिमों का डीएनए हिंदुओं जैसा

Thu, 21 Nov 2019 05:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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सुब्रमण्यम स्वामी - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का मामले ने अब सिसायी रूप ले लिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर फिरोज खान का समर्थन किया है। वहीं गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ट्वीट किया है। भाजपा के पूर्व सांसद परेश रावल ने बुधवार को ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देकर फिरोज खान का समर्थन किया।

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भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर इस मामले पर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने लिखा है कि 'क्या मुझे बता सकते हैं क्यों बीएचयू के कुछ छात्र मुस्लिमों को संस्कृत पढ़ाने का विरोध कर रहे हैं जब उन्हें नियत प्रक्रिया द्वारा चुना गया है? भारत के मुस्लिमों का डीएनए हिंदुओं के के पूर्वजों जैसा ही है। यदि कुछ नियम है तो इसे बदल दें ।'
 


बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट किया- "बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत अध्यापक के रूप में पीचयडी स्कालर फिरोज की नियुक्ति को लेकर शासन और प्रशासन का ढुलमुल रवैया ही मामले को तूल दे रहा है कुछ लोगों के शिक्षा को धर्म और जाति की राजनीति से जोड़ने के कारण उपजे इस विवाद को बिल्कुल भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है।"

 

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दो मिनट बाद ही एक दूसरे ट्वीट में कहा-"बीएचयू प्रशासन द्वारा एक अति योग्य मुस्लिम को शिक्षक के रूप में नियुक्त करना योग्यता को उचित मुकाम देना ही माना जाएगा। इसके विरोध में मनोबल गिराने वाला कोई भी काम किसी को भी करने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए। सरकार इस तुरंत समुचित ध्यान दे तो बेहतर होगा।"

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट किया- "हमारी भाषाएं और संस्कृति हमारी विशेषता हैं। संस्कृत भाषा में लिखा गया है, सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:।
दूसरे ट्वीट में कहा— सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संवैधानिक अधिकारी की रक्षा करनी चाहिए।"

बॉलीवुड एक्टर और भाजपा के पूर्व सांसद परेश रावल ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए कहा है कि बीएचयू में संस्कृत के लिए प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर हो रहे विरोध से स्तब्ध हूं। भाषा का धर्म से क्या मतलब है? विडंबना है कि फिरोज खान ने अपनी पीएचडी संस्कृत से की है। भगवान के लिए ये बेतुकी बातें करना बंद कीजिए।

 


वहीं उन्होंने अपने एक और ट्वीट में कहा कि फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर जो तर्क दिया जा रहा है, उसी तर्क को मान लिया जाए तो गायक मोहम्मद रफ़ी को कोई भजन नहीं गाना चाहिए था और नौशाद साब को कोई भजन नहीं लिखना चाहिए था।
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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा कि क्या यही हमारे देश में आया है? कोई भी सच्चा संस्कृतिकर्मी किसी भी धर्म के लोगों पर गर्व करेगा जो इस प्राचीन भाषा में महारत हासिल करेंगे।

किस धर्म की जुबान क्या होगी
चलो अब ये भी छांट लेते हैं
मंदिर-मस्जिद में बंट गई धरती 
अब जुबानें भी बाँट लेते हैं।

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