बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में चल रहा धरना सोलहवें दिन खत्म हो गया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दस दिन के भीतर मांगें पूरी करने का हवाला देते हुए इसकी घोषणा की। साथ ही उन्होंने मांगों पर कार्रवाई न होने तक कक्षाओं के साथ ही परीक्षा का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उधर, संकाय में दिन भर परीक्षा की तैयारी चलती रही। एसवीडीवी में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के खिलाफ शनिवार को रविंद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय हजारों की संख्या में छात्र पहुंचे और यहां पर कार्यालय प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। अपनी मांगों को दोहराते हुए संकाय में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को महामना मालवीय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में दो दिसंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं कराई जाएंगी। इसे लेकर बृहस्पतिवार देर शाम को आदेश भी जारी किया जा चुका है। लगातार पंद्रह दिन (7 से 21 नवंबर) संकाय बंद रहने की वजह से परीक्षा तैयारी भी बाधित रही। संकाय खुलने के दूसरे दिन शनिवार को सुबह से ही चहल-पहल रही। कक्षाएं तो नहीं चलीं, लेकिन शोध छात्र संकाय पहुंचे। संकाय प्रमुख के साथ ही सभी विभागों के शिक्षक भी अपने-अपने विभाग में पहुंचे और परीक्षा की तैयारी चलती रही। हालांकि डॉ. फिरोज इनमें शामिल नहीं थे।
डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे छात्रों ने शुक्रवार को बीएचयू सिंह द्वार पर कुलपति का पुतला फूंका। इस दौरान नियुक्ति में पारदर्शिता न बरतने, महामना के आदर्शों के विपरीत नियुक्ति करने आदि का आरोप लगाते हुए छात्रों ने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। छात्र मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि डॉ. फिरोज की नियुक्ति पर विवाद के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन अन्य विभागों में नियुक्ति कर रहा है। ऐसे में कुलपति को बर्खास्त कर मामले की सीबीआई से जांच कराना जरूरी है। इस दौरान अभिषेक त्रिपाठी, अवनींद्र राय, दिलीप, आलोक सिंह, अंशुमान द्विवेदी आदि मौजूद रहे।