बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय की ओर से कौस्तुभ जयंती समारोह मनाया गया। पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में बनारस घराने की प्रतिष्ठित विदुषी मीना मिश्रा ने दादरा, चैती, कजरी सुनाकर छात्र-छात्राओं को उसकी उपशास्त्रीय शैली से परिचित कराया। होली में गाया जाने वाला दादरा मोपे डारो न रंग गिरधारी रे..., तुम राधे बनो श्याम हम नंदलाला..., फिर चैती चैत मास सैंयां नहीं अइले हो रामा जिया घबराई हैं... और अंत में कजरी जमुना किनारे पड़ा हिंडोल, कहे को मेरो पालना... और दूसरी कजरी अरे राम बरखा की आई बहार... गाकर सिखाया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने हर विधा की लय, भाव, उच्चारण, बनारसी अंग और प्रस्तुति शैली को बारीकी से समझाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उपशास्त्रीय गायन की विविध शैलियों की व्यावहारिक समझ देकर बनारस घराने की समृद्ध सांगीतिक परंपरा को मजबूत किया गया।