बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में शुक्रवार छात्रों और डॉक्टरों के बीच हुए मारपीट के मामले में डॉक्टरों ने छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है वहीं शनिवार को छात्र अजीत कुमार चौरसिया ने डॉक्टरों के खिलाफ लंका थाने में तहरीर दी।
बीएचयू बीपीएड के छात्र अजीत चौरसिया ने तहरीर दी है कि मेरे नाना जी को पिछले 6 दिनों से बीएचयू के इमरजेंसी में रखा गया है उन्हें नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती नहीं किया गया। तीन दिन पहले डॉक्टरों ने कहा कि उनका कोरोना वायरस कराओ। कोरोना टेस्ट भी नेगेटिव आया उसके बाद ही उनको भर्ती नहीं किया गया।
जब हमने नेफ्रोलॉजी विभाग सीनियर डॉक्टर को जाकर भर्ती करने की बात कही तो उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टरों को मेरे पास बुलाओ। जब मैं जूनियर डॉक्टरों के पास गया और कहा कि आपको सीनियर डॉक्टर सर बुला रहे हैं तो वह आग बबूला हो गए और इमरजेंसी के डॉक्टर हम पर भड़क गए और कहा कि सर को कागज क्यों दिखाया मेरे मरीज को डिस्चार्ज करने लगे।
इसके बाद जूनियर डॉक्टर और वहां मेडिकल स्टाफ ने मेरे साथ हाथापाई की। मेरे मित्रों के जाने के बाद डॉक्टर जबरन मेरे मरीज को डिस्चार्ज करने लगे। हालांकि बाद में सुरक्षा गार्डों की दखलंदाजी के बाद मामला रूका लेकिन डॉक्टरों के दुर्व्यवहार की घटना लगातार सामने आती रही। छात्र ने आरोप लगाया कि मामला शांत होने के बाद भी दोनों डॉक्टर मुझे धमकी देते रहे।