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काशी विद्यापीठ का छात्रसंघ चुनाव स्थगित:  विश्वविद्यालय 24 तक बंद, वीवीआईपी मूवमेंट के कारण बैठक के बाद चुनाव टालने का निर्णय

Mon, 20 Dec 2021 11:08 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का छात्रसंघ चुनाव के दौरान छात्रों के हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय में तैनात रही भारी फोर्स
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का छात्रसंघ चुनाव अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। छात्रसंघ चुनाव स्थगित होने से प्रत्याशियों में आक्रोश है। छात्रों के हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 से 24 दिसंबर तक विश्वविद्यालय में पूर्ण अवकाश की घोषणा कर दी है।
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शहर में लगातार वीवीआईपी मूवमेंट के कारण अत्यधिक पुलिस फोर्स लगने के कारण विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है। सोमवार की शाम को छात्रसंघ चुनाव के लिए चुनाव समिति, सुरक्षा अधिकारियों और कुलानुशासक मंडल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में चुनाव अधिकारी प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि हमने छात्रसंघ चुनाव शांतिपूर्वक करवाने के लिए डीसीपी वरुणा जोन से मतदान के दिन पुलिस बल की मांग की थी। डीसीपी ने प्रधानमंत्री समेत अन्य वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई थी। इसके कारण चुनाव को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। 

 
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विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव के लिए नामांकन हो चुके हैं और 24 दिसंबर को चुनाव होने थे। इस सूचना के बाद से प्रत्याशियों में आक्रोश है। हंगामे को देखते हुए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं कुलसचिव सुनीता पांडेय ने 21 दिसंबर से 24 दिसंबर तक विश्वविद्यालय में पूर्ण अवकाश घोषित कर दिया है।

नाकामी छिपाने के लिए टलवा दिया है चुनाव 
पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने विद्यापीठ चुनाव स्थगित होने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अजय राय ने कहा कि सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए चुनाव टलवाया है, यह कदम निंदनीय है। चुनाव तिथि तय होने के बाद नामांकन के बाद इस तरह की हरकत करना निंदनीय है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा डरी हुई है क्योंकि भाजपा की छात्र इकाई को चुनाव लड़ाने के लिए प्रत्याशी तक नहीं मिल रहे थे। यह सरकार युवाओं छात्रों के अधिकारों का हनन करने पर उतारू हो गई है।
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