किसी भाषा, को धर्म से नहीं बाधा जा सकता है। मौलवी महेश प्रसाद ऐसे शिक्षक थे, जिन्होंने हिंदू होते हुए भी अरबी पढ़ा। उनकी किताबों को भी लोग कोट करते हैं। उर्दू विभाग में ही कई ऐसे छात्र हैं जो हिंदू हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। विरोध करने वाले छात्रों को इसको समझने की जरूरत है।
जो भी बोलना है पीआरओ ही बोलेंगे- कुलसचिव
विश्वविद्यालय में डॉ. फिरोज खान को लेकर चल रहे विवाद के मामले में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से बातचीत का प्रयास कई दिनों से चल रहा है लेकिन उनका फोन नहीं उठ रहा है। बुधवार को जब कुलसचिव डॉ नीरज त्रिपाठी से बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाते ही प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जो भी बोलना है, इसमें पीआरओ ही बोलेंगे। बेहतर होगा कि उन्हीं से बात की जाए।
न्याय न मिलने पर कोर्ट जाने का फैसला
डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर 14 दिन से कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे छात्रों ने अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है। बुधवार को शाम धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए छात्रों ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि आपत्ति विरोध फिरोज खान से नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन से हैं।
कला संकाय में अगर संस्कृत भाषा में किसी शिक्षक की तैनाती हो तो कोई आपत्ति नहीं लेकिन एसवीडीवी में इस तरह की नियुक्ति महामना के आदर्शों के विपरीत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति पर अगर पुनर्विचार नहीं किया तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस बीच बुधवार को भी दिन में छात्रों ने देवी भजनों की प्रस्तुति की।
संकाय के छात्र नियुक्ति के विरोध में 14 दिन से संकाय में तालाबंदी कर कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठे हैं। अब तक जहां विश्वविद्यालय प्रशासन कोई ठोस फैसला नहीं ले सका है वहीं संकाय में तालाबंदी से पढ़ाई ठप हो गई है। कहीं से कोई निर्णय न हो पाने की दशा में संकाय प्रशासन भी लाचार होकर नोटिस चस्पा कर छात्रों से संकाय खुलवाने में सहयोग मांगा है।