छात्रा ने कहा कि मेरे सभी दस्तावेजों, जिसमें EWS का अंडरटेकिंग फॉर्म भी सम्मिलित था, को 4 अलग-अलग प्रक्रियाओं से वेरिफिकेशन करके गुजारा गया। मुझे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। विभाग द्वारा पीएचडी का प्रवेश परिणाम घोषित किया गया, जिसमें मेरी UR कैटेगरी में रैंक 15 है और डिपार्टमेंट मुझे पीएचडी प्रवेश के लिए पेमेंट लिंक भेजने की तैयारी में था।
इससे पहले विभाग के कुछ प्रोफेसरों और केंद्रीय कार्यालय के शीर्ष अफसरों द्वारा अपने एक प्रिय छात्रा को प्रवेश कराने हेतु एडमिशन प्रक्रिया को बाधित करके प्रवेश के लिए भेजे जाने वाले पेमेंट लिंक को रोक विभाग द्वारा एक कमेटी बना दी गई।
बाद में कमेटी ने इस मामले को जबरन सिर्फ अपने प्रिय छात्र का प्रवेश कराने के उद्देश्य से USAB में मामले को भेज दिया गया। जहां मैं USAB के चेयरमैन और अन्य अधिकारियों से मिलने का प्रयास की तो सर्वप्रथम मुझसे मिलने तथा मेरी समस्याओं के निराकरण पर मना कर दिया गया।
बहुत प्रयास के बाद जब मैं कुछ अधिकारियों से मिली तो उनके द्वारा कहा जा रहा है कि आपने पुराना EWS सर्टिफिकेट क्यों जमा किया? जब मैं प्रतिउत्तर में बोली कि मैंने अंडरटेकिंग फॉर्म जमा करके 29 मार्च को ही नया EWS सर्टिफिकेट जमा कर दी हूं तो उनके द्वारा कहा गया कि हम इन सब अंडरटेकिंग को नहीं मानता हूं। इसलिए तुम्हारा एडमिशन नहीं किया जाएगा।
जबकि पीएचडी इनफॉरमेशन बुलेटिन में भी ऐसी कोई बात नहीं है कि अंडरटेकिंग फॉर्म मान्य नहीं होगा। इतना ही नहीं मेरे विभाग में ही कुछ अन्य छात्र-छात्राओं द्वारा अंडरटेकिंग फॉर्म जमा करके बाद में सर्टिफिकेट जमा किया गया। उनका प्रवेश भी हो चुका है। इसके बाद USAB के अधिकारियों ने कहा कि ये मामला तुम्हारे एडमिशन पर आकर रुका है तो नया नियम तुम्हारे लिए ही बनेगा।
ऐसी साजिश सिर्फ अपने प्रिय छात्र को नियमों से परे जाकर एडमिशन दिलाने के लिए किया जा रहा है। छात्रा ने कहा कि पीएम मोदी का मानना है तथा केंद्र की कई योजनाएं हैं कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जबकि यहां उन्हीं के शासन तंत्र द्वारा नियुक्त अधिकारियों द्वारा मेरी अकादमिक हत्या की जा रही है।
मुझे पिछले 15 दिनों से विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों के केबिन में चक्कर लगवाया जा रहा है। डिपार्टमेंट का कहना है कि अगर केंद्रीय कार्यालय के अधिकारियों से हमें नियमों के अनुसार आपका प्रवेश लेने के लिए बोल दिया जाएगा तो मेरा एडमिशन हो जाएगा। इसलिए मैं केंद्रीय कार्यालय पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठी हूं।