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खनन हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की सौदेबाजी, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

Sun, 01 Mar 2020 09:19 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
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इसी जगह हादसे में पांच मजदूरों की हो गई थी मौत। - फोटो : अमर उजाला।
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सोनभद्र जिले के ओबरा में खनन हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के शवों का सौदा करने की कोशिश की गई। इसको लेकर वीडियो वायरल हुआ है। इसमें खान अधिकारी की तरफ से 17-17 लाख में मामला निपटाने का प्रयास करने की बात की जा रही है। बात नहीं बनी, तब चुप्पी साध ली गई। प्रभारी मंत्री सतीश द्विवेदी ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।

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वायरल वीडियो 1.46 मिनट का है और इसे जिला अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस परिसर का बताया जा रहा है। इसमें खान अधिकारी पीड़ित पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति से बात करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के मुताबिक, वह बात की शुरुआत करते हुए कहते हैं कि जब पट्टाधारक नकद दे रहा है तो मुकदमा क्यों लड़ना चाहते हो?

सामने वाला कितना मिलेगा पूछता है तो खान अधिकारी कुल मिलाकर 17 लाख बताते हैं। इसका विवरण भी देते हैं। कहते हैं कि दो लाख का चेक, पांच लाख कैश, सात लाख पट्टाधारक की तरफ से कराए गए बीमा के तहत, तीन लाख किसान सर्वहित बीमा योजना से दिलाएंगे। सात लाख तत्काल, शेष दस लाख प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलने की बात भी कहते दिख रहे हैं।

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सामने वाले को अधिकारी यह भी बताते हुए दिख रहे हैं कि घटनास्थल पर सारे परिजन मान गए हैं कि जो सहयोग मिल रहा है, वह ले लेंगे, मुकदमा नहीं लड़ना चाहते। वीडियो में सामने वाला कम से कम 25 लाख की मांग करता है, जिस पर वह तैयार नहीं होते। 

खान अधिकारी द्वारा पीड़ित पक्ष से रुपये के लेन-देन की बातचीत का वीडियो वायरल होने का मामला संज्ञान में है। इसकी जांच कराई जाएगी। वीडियो सही मिला तो कार्रवाई होगी। - सतीश द्विवेदी, जिले के प्रभारी मंत्री, सोनभद्र।
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मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की उठाई मांग
 वायरल वीडियो पर विपक्षी दलों की तरफ से भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। कांग्रेस के निवर्तमान जिला महासचिव धीरज पांडेय ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र मेल कर खदान हादसे में हुई मौतों की सौदेबाजी किए जाने का आरोप लगाया है। खान अधिकारी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। आरोप लगाया है कि पूर्व में भी इसी तरह सरकारी नुमाइंदों और खननकर्ताओं का गठजोड़ कई मजदूरों की जिंदगियां ले चुका है और खरीद-फरोख्त का रास्ता अपनाकर घटनाओं पर पर्दा डाला जा चुका है।

खान सुरक्षा निदेशालय पर भी उठ रहे सवाल
खान सुरक्षा निदेशालय की एक टीम नियमित अंतराल पर खनन क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट तैयार करती रहती है। उसकी रिपोर्ट पर पूर्व में कई खदानें बंद भी हो चुकी हैं। बावजूद इसके बिल्ली-मारकुंडी में डेंजर जोन के रूप में तब्दील हो चुकी खदानों पर निदेशालय के लोगों की नजर क्यूं नहीं पड़ी? अगर पड़ी तो उनकी रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई, जैसे सवाल लोगों के जेहन में सुलगते रहे।
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