यूपी के भदोही जिले के कालीन निर्यातक द्वारा बैंक से साढ़े सात करोड़ की धोखाधड़ी का मामला उजागर होने के बाद कालीन कारोबारियों में हड़कंप है। सीबीआई के मामला दर्ज कराने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि गहनता से छानबीन की जाए तो कालीन परिक्षेत्र भदोही में ऐसे और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।
ताजा प्रकरण के बाद जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि कालीन औद्योगिक परिक्षेत्र में कई ऐसे निर्यातक हैं, जो केवल ड्रॉ-बैक, इंपोर्ट लाइसेंस के लिए बोगस और फर्जी व्यापार कर रहे हैं। धोखाधड़ी से मोटी कमाई करते हैं और सरकार को भी चूना लगाते हैं।
ऐसे होता है खेल..
माल बनाकर निर्यात करने के लिए सरकार ने निर्यातकों को बैंक से एडवांस की सहूलियत दी है। नगर के एक प्रमुख निर्यातक ने बताया कि निर्यात ऑर्डरशीट दिखाकर निर्यातक बैंकों से प्री-शिपमेंट और पोस्ट शिपमेंट एडवांस उठाते हैं, जो माल की कीमत का 90 प्रतिशत तक हो सकता है।
माल निर्यात होने के नियत समय पर भुगतान आ गया तो ठीक नहीं तो बैंक का भुगतान फंस जाता है। नईबाजार के निर्यातक के विरुद्ध सीबीआई के मुकदमे के मामले में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने साफ लिखा है कि शिवांग कारपेट के निदेशकों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे 7.40 करोड़ रुपये उठा लिए।
जिसका भुगतान आज तक नहीं हुआ है। चर्चाओं में यह भी है कि निदेशकों ने मूलत: यह कर्ज स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे) से लिया था। गत वर्ष एसबीबीजे का एसबीआई में विलय हो जाने के बाद एसबीआई अधिकारियों ने एसपी सीबीआई से शिकायत की थी।