एसटीएफ के इंस्पेक्टर विपिन राय के अनुसार जिला पुलिस ने यदि जवाहर के खिलाफ लुक आउट कॉर्नर नोटिस न जारी किया होता तो वो विदेश भाग जाता। नोटिस जारी होने से पहले जवाहर बस्ती, लखनऊ, उत्तराखंड, नई दिल्ली और नेपाल में छुप कर रह रहा था।
नोटिस जारी होने के बाद वह शराब कारोबारी रिश्तेदार के दमोह स्थित बड़े घर में छुप कर अकेले रह रहा था और किसी से बातचीत या मुलाकात नहीं करता था। एसटीएफ ने जवाहर को कैंट पुलिस को सुपुर्द किया तब भी वो ऐंठन में ही दिखा और पुलिसकर्मियों को अपने धनबल के किस्से सुनाने के साथ ही करोड़ों के नुकसान की बात कर रहा था।
वहीं, जब जवाहर को पुलिस कैंट थाने से लेकर अदालत के लिए निकली तो पीछे आधा दर्जन से अधिक लक्जरी वाहन चल रहे थे। इस दौरान जवाहर को देखने के लिए वादकारियों और अधिवक्ताओं की अच्छी-खासी भीड़ रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत के बाहर उमड़ी हुई थी। सोयेपुर जहरीली शराब कांड से चर्चा में आया छोटा लालपुर निवासी जवाहर कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर है।
सोयेपुर में जहरीली शराब पीने से 28 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में जवाहर 22 महीने तक जेल में रहा था। कैंट पुलिस के अनुसार जवाहर के खिलाफ हत्या, गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, छल, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों में जिले के साथ ही अन्य जनपदों के थानों में 17 मुकदमे दर्ज हैं।
पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल की जिंदगी फिल्मों सरीखी नाटकीय रही है। जवाहर को करीब से जानने वालों के अनुसार 80 के दशक में उसने साइकिल से और फिर बाइक से घूम कर देसी शराब बेची। तकदीर ने कुछ ऐसा साथ दिया कि वह पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश का लिकर किंग कहलाने लगा।
देसी शराब की बिक्री से अकूत संपत्ति एकत्र कर जवाहर ने राजनीति में किस्मत आजमाई। उसने 1990 के दशक में कांग्रेस का दामन थामा और जिला पंचायत अध्यक्ष बना। इसी दौरान उसने हेलीकॉप्टर खरीदने की अर्जी दी तो प्रदेश के साथ ही देश में उसका नाम सुर्खियों में आया।
हालांकि तकनीकी कारणों से जवाहर हेलीकाप्टर खरीदने में सफल नहीं हो सका। इसके बाद 1999 में वो चंदौली से सपा से सांसद निर्वाचित हुआ। 2009 में चंदौली से ही जवाहर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।