काशी के गंगा-वरुणा संगम पर बसा गांव सराय मोहाना जिले का पहला ‘स्मार्ट विलेज’ बनेगा। सूचना एवं प्रौद्योगिक मंत्रालय के सहयोग से इस गांव को ‘डिजिटल इंडिया’ से जोड़ने के साथ ही पूरे गांव को वाई-फाई से लैस करने की तैयारी है। गांव को पूरी तरह से कंप्यूटर साक्षर बनाया जाएगा। महिलाओं, युवतियों को व्यवसायिक शिक्षा के जरिये आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी की जाएगी। इन सबके लिए इस गांव में रूरल रिसोर्स इंफार्मेटिक सेंटर स्थापित किया जाना है।
गंगा-वरुणा संगम के छोर पर तकरीबन आठ हजार आबादी वाला गांव है सराय मोहाना। यहां बुनकर आबादी सबसे ज्यादा है। यदि किसी को बनारसी रेशमी साड़ी और कलात्मक कपड़ों की भेंट देनी हो तो इसकी कारीगरी का काम यहीं के लोगों को दिया जाता है। बुनकरों के बाद यहां सर्वाधिक आबादी मल्लाहों की है। मौजूदा समय में लकड़ी के पुल के सहारे गंगा पार कर इस गांव के लोग शहर आते-जाते हैं लेकिन जल्द ही इस गांव की सूरत कुछ बदलने वाली है।
बनारस की संस्था साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल टेक्नालॉजी और सोशल एक्शन फाउंडेशन ने इस गांव को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने का प्लान बनाकर सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भेजा है। उन्होंने गांव में रूरल रिसोर्स इंफार्मेटिक सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। संस्थान के निदेशक अजय कुमार का कहना है कि मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद अप्रैल से इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। गांव को कंप्यूटर साक्षर बनाने के साथ ही दूसरी बड़ी पहल वहां की महिलाओं, युवतियों को व्यावसायिक शिक्षा के जरिये आत्मनिर्भर बनाने की होगी। उन्हें कंप्यूटर सहित अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण मुहैया कराए जाएंगे।