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पिता की ख्वाहिश पूरा करने लिए बेटियां बनीं नेशनल खिलाड़ी

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वाराणसी। फादर्स डे पर हर कोई अपने पिता के लिए कुछ खास करना चाहता है। इसी क्रम में काशी की बेटियों ने भी पिता की ख्वाहिश के लिए कई नेशनल प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर पिता को समर्पित किया, जो एक पिता को बेटी की तरफ से फादर्स डे पर मिला सम्मान है।
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किसान की बेटी ने पिता के सपने को किया साकार
सारनाथ की नेशनल कराटे खिलाड़ी कोमल भारद्वाज के किसान पिता बिरजू भारद्वाज की ख्वाहिश थी कि उनकी बेटी भी नेशनल खिलाड़ी बने। इसके बाद बिरजू ने कोमल का दाखिला कराटे क्लास के लिए सारनाथ में करा दिया। जहां कड़ी मेहनत के बाद कोमल को स्टेट कराटे चैंपियनशिप खेलने का मौका मिला। इसके बाद कराटे एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ऑफिशियल चैंपियनशिप में यूपी का प्रतिनिधित्व करते हुए सब जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप 2015 में कांटा इवेंट में कांस्य पदक जीता। इसी वर्ष दिल्ली में आयोजित आठवें कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया। सातवें ओपन अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इस तरह 17 वर्षीय कोमल ने कई पदक जीतकर अपने पिता बिरजू को समर्पित किया। कोमल ने बताया कि अभी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपने पिता के लिए मेडल जितना चाहती हूं।
वेदिका ने पिता गौरव सिंह का बढ़ाया गौरव
सैनिक सिक्योरिटी कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी गौरव सिंह की बेटी वेदिका सिंह ने किक बॉक्सिंग, वूशु और कराटे में नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपने पिता का गौरव बढ़ाया। वेदिका ने अपने छह साल के खेल कॅरियर में छह बार नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, जिसमें एक स्वर्ण पदक वूशु में और चार स्वर्ण पदक किक बॉक्सिंग में जीता, जिसे अपने पिता गौरव सिंह को समर्पित किया। 16 वर्षीय वेदिका ने बताया कि उनके पिता कॉलेज के दिनों वॉलीबाल खिलाड़ी हुआ करते थे। मगर घर की जिम्मेदारियों के आगे उन्होंने अपने खिलाड़ी होने के सपने का गला घोंटकर व्यापार में लग गए। उनके सपने को साकार करने का मौका मुझे मिला तो मैने जीतोड़ मेहनत की और नेशनल खिलाड़ी बनकर अपने पापा के सपने को साकार किया।
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चाय वाले के बेटे ने जीता पदक तो पिता का सपना हुआ साकार
अस्सी घाट पर चाय की दुकान चलाने वाले मल्लू को भी बेटे पवन साहनी को नेशनल खिलाड़ी बनाने का ख्वाब था। पिता की इच्छा को पवन ने अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत पूरा भी किया। साल 2018 में पवन जिला स्तरीय ताइक्वांडो में जीत दर्ज करते हुए आगरा में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इसकी बदौलत इसी वर्ष पवन हैदराबाद में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता के लिए भी चयनित हुए। इस प्रतियोगिता में पवन ने अच्छा प्रदर्शन तो किया मगर कोई पदक नहीं जीत सका, बावजूद इसके मल्लू को इस बात से संतोष रहा कि उनका बेटा उनकी ख्वाहिश के लिए नेशनल स्तर की प्रतियोगिता का प्रतिभागी तो बना।
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