प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र कहते हैं कि उनका स्वतंत्र तबला वादनअलग-अलग अनुभूतियां दे जाता था। गायिका सोमा घोष का मानना है कि महाराज जी जैसी महारत वाला कोई तबला वादक दूर-दूर तक नहीं था। उनके शिष्य और नाती पं. रजनीश मिश्र ने भी उनसे गंडा बंधवाया था और आज भी वह उनका अनुसरण करते हैं।
पद्मश्री डॉ सोमा घोष।
जिंदगी को वर्तमान के शीशे में देखते थे
पं. किशन महाराज के पुत्र पं. पूरन महाराज कहते हैं कि पिताजी ने युवा अवस्था में कई फिल्मों में तबला वादन किया था। इनमें नीचा नगर, आंधियां, बड़ी मां आदि फिल्में प्रमुख हैं। उनका जिंदगी जीने का अंदाज बिंदास रहा। वह जिंदगी को हमेशा वर्तमान के शीशे में देखा करते थे। लुंगी कुर्ते में पूरे मोहल्ले की टहलान और पान की दुकान पर मित्रों के साथ जुटान ताजिंदगी उनका शगल बना रहा।
प्रमुख सम्मान -
1973 में पद्मश्री, 1984 में केंद्रीय संगीत नाटक पुरस्कार, 1986 में उस्ताद इनायत अली खान पुरस्कार, 2002 में पद्मविभूषण सम्मान मिला। इसके अलावा दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार, ताल विलास, उत्तर प्रदेश रत्न, उत्तर प्रदेश गौरव, भोजपुरी रत्न, भागीरथ सम्मान और लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान भी उन्हें मिला था।