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कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा: अवसर और चुनौतियां विषय पर वक्ताओं ने रखे विचार

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मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विशिष्ट व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव संगल रहे। व्याख्यान का विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा: अवसर और चुनौतियां रहा। प्रो. राजीव संगल ने कहा कि भारत सरकार के नेशनल मिशन ‘भाषिणी’ एप के निर्माण की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसमें विभिन्न अकादमिक संस्थानों के 70 रिसर्च समूहों ने मिलकर काम किया तथा इसका विकास किया। प्रो. राजीव ने कहा कि इसका उपयोग अत्यंत सावधानी से करने की आवश्यकता है। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नई तकनीक से जहां कुछ रोजगार समाप्त होते हैं तो साथ ही बड़ी मात्रा में रोजगार उत्पन्न भी होते हैं, जैसे कंप्यूटर क्रांति ने भारत में नए रोजगार के अवसर और पारदर्शिता भी लाई है। मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि प्रोफेसर राजीव संगल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन अनुवाद के क्षेत्र में जो अग्रणी कार्य किया है वो हम सबके लिए अत्यंत उपयोगी है ही। कार्यक्रम में प्रो. कमलशील, प्रो. आरके मंडल, प्रो. आरके मिश्रा, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. अर्चना कुमार आदि मौजूद रहे।
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