वाराणसी। कभी रोती कभी हंसती हैं कभी लगती शराबी सी/मोहब्बत जिसमें रहती है वो आंखें कुछ और होती हैं...। मीठे बोल, माधुर्य और प्रेम पर आधारित जीवन शैली के सूत्र और ईश्वर के प्रति जीव के संबंधों को संत मोरारी बापू ने सोमवार को शेरो-शायरी और फिल्मी नगमों के जरिए बताया।
उन्होंने मधुमास की विस्तार से व्याख्या की। साथ ही सुख के लिए योग, चिंतन, स्वाध्याय और संगीत को आधार बनाने की सीख दी। कहा कि धर्म के नाम पर नकारात्मक सोच से जीवन को विषाक्त नहीं करना चाहिए। वेश की नहीं, देश की चिंता करने का संदेश दिया।
मोरारी बापू के सहज भाव और अंदाज पर कथा प्रेमियों की हजारों की भीड़ थिरकती, नाचती रही। उन्होंने शेर पढ़ा कि-इश्क जिसको फितूर लगता है/वो खुद से बहुत दूर लगता है/जिसने कभी कोई सफाई नहीं दी/वह आदमी बेकसूर लगता है...। जयकारे लगने लगे। बापू ने कहा कि मधुमय जीवन जीने के लिए हरि स्मरण के साथ जितना भी संभव हो सके, वह सब करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कथा में किसी इच्छा की पूर्ति के भाव से नहीं आना चाहिए। कथा अंत:करण को शांति देने वाली होती है। कहा कि जीवन प्रसन्न रहने के लिए मिला है। यह बहुत मीठा है और इस मिठास को बनाए रखने के लिए जो भी संभव हो उसे करना चाहिए। बशर्ते वह दुष्परिणाम देने वाली कोई प्रवृत्ति नहीं होनी चाहिए।
इससे पूर्व कथा के आयोजकों से उन्होंने भक्तों के लिए भोजन के इंतजाम के बारे में भी जानकारी ली। वहीं अमेरिका, लंदन, जर्मनी के अलावा देश के कई शहरों से भक्त बापू की कथा सुनने के लिए काशी पहुंचे हैं।