किसी भी बच्चे की शिक्षा की शुरुआत घरेलू शिक्षा से होनी चाहिए उसके बाद ही स्कूल शिक्षा। शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि जहां तक हाईस्कूल और इंटर का सवाल है तो दोनों के कोर्स एक वर्ष के होने चाहिए जबकि इस नीति में बारहवीं की जगह 5-3-3-4 यानी 12 कि जगह 15 वर्ष निर्धारित किया गया। इसमे बिना वजह तीन साल का समय ज्यादा दिया गया।
नई शिक्षा नीति में रटंत शिक्षा को समाप्त करने का आह्वान तो है लेकिन विद्यार्थियों की परीक्षा कैसे ली जाएगी स्पष्ट नहीं है। बंद किताब तीन घंटे की परीक्षा व्यवस्था जो दूसरे परीक्षा केंद्र में होती है, चलती रहेगी या कुछ घंटों की बंदिश के खात्मे के साथ खुली किताब परीक्षा की शुरुआत की जाएगी। परीक्षा ऐसी हो जो कानून व्यवस्था का प्रश्न ना बने बल्कि शैक्षणिक दायरे में सीमित रहे।
मल्टीपल डिसिप्लिन उच्च शिक्षा एक अच्छा प्रस्ताव है लेकिन क्या उच्च शिक्षण संस्थाओं या विश्वविद्यालयों के प्रबंधन में छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों की भागीदारी रहेगी, इसमें स्पष्ट नहीं है। विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने देश में अपनी शाखाएं खोलने के लिए जरूर आमंत्रित किया गया किंतु तय नहीं है कि फीस और पाठ्यक्रम कौन तय करेगा।