फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने नई शिक्षा नीति पर उठाया सवाल, बोले- कागजी बनकर रह जायेगी नीति

Fri, 31 Jul 2020 07:37 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश।
विज्ञापन

सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने कैबिनेट द्वारा मंजूर नई शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करते हुए इसे सरकार का विजन डॉक्यूमेंट बताया है। कहा कि यह ऐसा विजन डॉक्यूमेंट है जो शिक्षा व्यवस्था की जड़ता को तोड़ने का आह्वान करता है लेकिन इसका सही मूल्यांकन तब होगा जब इसे भारत के विभिन्न राज्यों में लागू किया जाएगा और इस बाबत कानून भी बनाए जाएंगे।

विज्ञापन

 
सपा एमएलसी  ने कहा कि किसी भी नेशन स्टेट (गणराज्य) की जिम्मेदारी है कि वह अपने निवासियों के स्वास्थ्य और शिक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन करें और जीडीपी का 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करें। इस नीति में पूर्व स्कूलिंग की उम्र 3 वर्ष निर्धारित की गई है जो बहुत कम है। इसे कम से कम 4 वर्ष से शुरू होनी चाहिए। 

विज्ञापन

किसी भी बच्चे की शिक्षा की शुरुआत घरेलू शिक्षा से होनी चाहिए उसके बाद ही स्कूल शिक्षा। शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि जहां तक हाईस्कूल और इंटर का सवाल है तो दोनों के कोर्स एक वर्ष के होने चाहिए जबकि इस नीति में बारहवीं की जगह 5-3-3-4 यानी 12 कि जगह 15 वर्ष निर्धारित किया गया। इसमे बिना वजह तीन साल का समय ज्यादा दिया गया।
 
नई शिक्षा नीति में रटंत शिक्षा को समाप्त करने का आह्वान तो है लेकिन विद्यार्थियों की परीक्षा कैसे ली जाएगी स्पष्ट नहीं है। बंद किताब तीन घंटे की परीक्षा व्यवस्था जो दूसरे परीक्षा केंद्र में होती है, चलती रहेगी या कुछ घंटों की बंदिश के खात्मे के साथ खुली किताब परीक्षा की शुरुआत की जाएगी। परीक्षा ऐसी हो जो कानून व्यवस्था का प्रश्न ना बने बल्कि शैक्षणिक  दायरे में सीमित रहे।  


मल्टीपल डिसिप्लिन उच्च शिक्षा एक अच्छा प्रस्ताव है लेकिन क्या उच्च शिक्षण संस्थाओं या विश्वविद्यालयों के प्रबंधन में छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों की भागीदारी रहेगी, इसमें स्पष्ट नहीं है। विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने देश में अपनी शाखाएं खोलने के लिए जरूर आमंत्रित किया गया किंतु तय नहीं है कि फीस और पाठ्यक्रम कौन तय करेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें