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चौताल की ताल से गूंजा गंगा तट

Tue, 17 Feb 2015 02:10 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
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वाराणसी। तुलसी घाट पर सोमवार की रात प्राचीन वाद्य पखावज पर तीन महारथियों के संगम में तालों की त्रिवेणी बह निकली। ध्रुपद अंग में चौताल पर पुरानी परन की बंदिशों, छंदों पर उंगलियों के थाप से विश्व भर के संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा।
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महाराज बनारस विद्या मंदिर न्यास की ओर से आयोजित 41वें ध्रुपद मेले की तीसरी निशा में गायन-वादन की प्रस्तुतियां लोगों के लिए यादगार बन गईं।
रात आठ बजे शुरुआत रामपुर से आए रामजी लाल शर्मा के पखावज वादन से हुई। उन्होंने मृदंग गुरु कोदऊ सिंह की परंपरा की प्रतिनिधि परनों से अपनी आमद दर्ज कराई। सारंगी पर ध्रुव सहाय ने संगत की। इनके बाद मुंबई से आए मृणाल उपाध्याय, प्रताप राज पाटिल, कुणाल पाटिल ने पखावज पर त्रिबंदी की प्रस्तुति की।
 इन कलाकारों ने प्राचीन बंदिशों को खुले बोल और दमदारी के साथ द्रुत लय में बजाकर तालियां बटोरी। हारमोनियम पर आशुतोष उपाध्याय थे। इनके बाद काशी के युवा कलाकार सुर बहार पर राग जोग की अवतारणा की। अलाप, जोड़ के बाद इन्होंने गायकी अंग में द्रुत लय की रचनाओं की मनोहारी प्रस्तुति की।
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इसके साथ अंकित पारिख ने पखावज पर संगत की। इनके बाद भोपाल से आई उस्ताद नसीर अमीनुद्दीन डागर की शिष्या पद्मजा विश्वरूप ने विचित्र वीणा पर राग भिन्नषड़ज का वादन किया। अलाप, जोड़ के बाद इन्होंने गत बजाई। पखावज पर अंकित पारिख ने संगत की। इनके बाद आशुतोष भट्टाचार्य ने प्रस्तुति की।
फिर देश की जानीमानी ध्रुपद गायिका डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने राग जयंत मल्लहार की अवतारणा की। उन्होंने राग माला में भी बंदिश पेश की। पखावज पर प्रवीण आर्या थे। हारमोनियम पर जमुना वल्लभ गुजराती ने संगत की। कुशल संचालन प्रीतेश आचार्य ने किया।
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