फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शोवना ने पार्वती के शृंगार को नृत्य के भावों में पिरोया

Tue, 17 Feb 2015 02:18 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। शिव विवाह के पर्व महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर सोमवार की रात प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने पार्वती के शृंगार को नृत्य के भावों में पिरोया। पावों की थिरकन और नैनों के इशारों से सजने, संवरने और शरमाने की उनकी नाजोअदा ने हर किसी का ध्यान खींचा। राजेंद्र प्रसन्ना ने बांसुरी की तान से शाम सजाई। इसी के साथ तीन दिनी शिवरात्रि संगीत महोत्सव का आगाज हो गया।
विज्ञापन

दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय परिसर में शुरुआत शालिनी के गायन से हुई। राग शुद्ध कल्याण में विलंबित तीन ताल की बंदिश के बोल थे- बोलन लागे पपीहा...।
इसके बाद मध्यलय तीन ताल की बंदिश के बोल थे- पियरवा आए मोरे मंदिरवा...। होरी के बाद भजन की भी उन्होंने प्रस्तुति की। तबले पर किशोर मिश्र, हारमोनियम पर रामचंद्र भागवत ने संगत की। इनके बाद दिल्ली से आए पं.राजेंद्र प्रसन्ना ने बांसुरी पर राग गोरख कल्याण की अवतारणा की।
विज्ञापन

गायकी अंग में उन्होंने विलंबित एक ताल में गत बजाने के बाद तीन ताल में गतकारी की। इसके बाद पूर्वी धुन बजाकर उन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की ललित कुमार ने। अंत में कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने शिव स्तुति से अपनी आमद दर्ज कराई। आमद, परन, टुकड़े, तिहाई के बाद उन्होंने चक्करदार की प्रस्तुति की।
 इसके बाद पार्वती के शृंगार को उन्होंने नृत्य के भावों में व्यक्त किया। कथक में परंपरागत परन छंद की प्रस्तुति के बाद उन्होंने द्रोपदी चीरहरण की तिहाई लगाकर विराम लिया। तबले पर शकील अहमद, पखावज पर महावीर गंगानी, सितार पर विजय शर्मा और गायन माधो प्रसाद ने किया।
 संचालन किया गीतकार हरिराम द्विवेदी ने। इससे पहले भागवतकथा मर्मज्ञ रमेश भाई ओझा और स्वामी अनुभवानंद ने दीप जलाकर संगीत निशा का उद्घाटन किया। कलाकारों का स्वागत किया किशन जालान ने। यह कार्यक्रम किशोरी लाल जालान सेवा ट्रस्ट की ओर से किया गया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें