मेले में सुबह से ही पूजन सामग्री की दुकानों पर भी रौनक रही। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी के मुखौटों, मिट्टी की प्रतिमाओं, 16 बत्ती वाले मिट्टी के दीपों और अन्य पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी की। पूजन परंपरा के अनुसार महिलाएं मां लक्ष्मी के मुखौटों और मिट्टी की प्रतिमाओं को बांस की डलिया यानी पौती में सजाकर सिर पर रखकर घर ले जाती हैं। इनकी अगले 16 दिनों तक घर में विधि-विधान से नित्य पूजा की जाती है।
दुकानदारों के अनुसार भोर से ही मेले में खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी। मुखौटों और प्रतिमाओं के अलावा सोरहिया डोरा, दीप और अन्य पूजन सामग्री की बिक्री भी तेज रही। मेले के कारण लक्ष्मीकुंड और आसपास के क्षेत्र में दिनभर चहल-पहल बनी रही। आस्था के साथ मेले में स्थानीय दुकानदारों का कारोबार भी बढ़ा।