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Varanasi News: गीत समाज का दर्पण, चेतना और संभावनाओं का प्रतीक

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बीएचयू के हिंदी विभाग में हिंदी नवगीत का समकाल विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को उद्घाटन हुआ। इस दौरान कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि गीत, न केवल समाज का दर्पण है, बल्कि उसकी चेतना और संभावनाओं का भी प्रतीक है। समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हमारे विचार व्यापक, संवेदनशील और सकारात्मक हों। विभाग के आचार्य रामचंद्र शुक्ल सभागार में हुई संगोष्ठी में कुलपति ने कहा कि हमें ऐसा समाज गढ़ना है जो न केवल वर्तमान को समझे बल्कि भविष्य को भी दिशा दे। संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि गीत अपने स्वभाव में सदैव नवीन होता है। वह पुरानी अनुभूतियों को भी नई संवेदना और नए शब्दों में अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता रखता है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने विचार रखे। स्वागत हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप, संचालन डॉ. हरीश कुमार, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सत्यप्रकाश पाल ने किया।
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