वाराणसी। सोनभद्र में 17 जुलाई को हुए खूनी संघर्ष के बाद बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती घायलों को आजीविका ही नहीं, दवा की भी चिंता सता रही है। रविवार को उन्होंने कहा कि अस्पताल में तो दवाएं मिल जा रही हैं, लेकिन जब रोजी-रोटी का इंतजाम करना ही मुश्किल है तो यहां से छुट्टी मिलने के बाद वह दवा की व्यवस्था कैसे करेंगे।
बीएचयू ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में भर्ती छह घायलों में से एक केरवा देवी की हालत नाजुक हैं और वह आईसीयू में भर्ती है। जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही केरवा देवी के सिर में गंभीर चोट है। परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद भी उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। पांच का इलाज इमरजेंसी के ग्रीन वार्ड में चल रहा है। इनके हाथ-पैर में फ्रैक्चर के साथ ही चेहरे और शरीर में दो-तीन जगह जख्म के निशान है। दिनेश के चेहरे पर चोट है, जबकि सुखवंती और जयप्रकाश भी गंभीर रूप से घायल है। हालांकि केरवा देवी को छोड़कर अन्य की हालत में सुधार हो रहा है। पहले दिन जो बातचीत करने में असमर्थ थे, अब वह परिजनों के साथ ही चिकित्सकों से बात कर रहे हैं।
घायलों के परिजनों का कहना है कि धान की रोपाई ही नहीं हो पाई है। जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलेगी तो जीवन यापन के साथ ही दवा की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। उधर, रविवार को भी राष्ट्रीय लोकदल सहित कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना।
अखिल भारतीय प्रगतिशील संगठन (ऐपवा) के पदाधिकारियों ने सोनभद्र की घटना के लिए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, राज्य अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी, राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि महिला सशक्तीकरण की बात करने वाले मुख्यमंत्री के शासनकाल में ही महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैं। ऐपवा का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सोनभद्र जाकर जांच करेगा और रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा। उन्होंने दोषियाें की तत्काल गिरफ्तारी, उच्च स्तरीय जांच, डीएम, एसपी के निलंबन, आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक देने और महिलाओं के नाम पट्टा करने की मांग की। बरेली की साक्षी मिश्रा के दलित युवक से शादी करने की घटना का जिक्र करते हुए पदाधिकारियाें ने प्रदेश सरकार की चुप्पी पर तंज कसा। बताया कि महिला हिंसा के खिलाफ ऐपवा की ओर से जल्द यूपी में राज्य सम्मेलन होने वाला है। इसमें करीब 50 हजार सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।