बेहोश हुईं नानी को भेजा गया अस्पताल।
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मीना देवी के अनुसार, नाबालिग के लापता होने के मामले में पुलिस ने उनके पुत्र करन और एक अन्य नाबालिग को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि विवेचना के दौरान उपलब्ध महत्वपूर्ण साक्ष्यों और तथ्यों की अनदेखी की गई।
उन्होंने दावा किया कि मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज धारा 164 के बयान सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है। उनका यह भी आरोप है कि एक युवक नाबालिग को करीब 20 दिनों तक अपने रिश्तेदारों के यहां रखे रहा, लेकिन उसके बावजूद निर्दोष बच्चों को मुकदमे में आरोपी बनाया गया। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सभी साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया जाए और वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कुछ देर तक पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाकर शांत कराया। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि मामले की विवेचना एसीपी सारनाथ कर रहे हैं। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर निष्पक्ष एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।