जम्मू -कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात जवान हेमंत कुमार पांडेय का का शव गुरुवार की देर रात बलिया स्थित पैतृक गांव सिसवार कला जैसे ही पहुंचा, पूरा माहौल गमगीन हो गया। एक तरफ जवान की मां लालमुनि का रो रोकर बुरा हाल था तो दूसरी तरफ उसकी पत्नी सीमा की चीत्कार से लोगों की आंखें नम हो जा रही थीं।
बेटा संस्कार और बेटी संस्कृति की आंखें उस ताबूत को निहार रही थी, जिसमें उनके पापा का शव तिरंगे में लपेटा हुआ था। एसडीएम, तहसीलदार व कोतवाल की मौजूदगी में सेना के जवान को गार्ड आफ आनर दिया गया।
देश की रक्षा का जज्बा लिए सेना में भर्ती हुए हेमंत पांडेय (37) के निधन का समाचार क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। गुरुवार की देर रात सेना के जवान हेमंत का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। सैकड़ों की संख्या में भीड़ उनके दरवाजे पर पहुंच गई। चार भाइयों में तीसरे नंबर के हेमंत ही एक मात्र घर का सदस्य था, जो की सरकारी नौकरी में था।
अन्य भाइयों में दो प्राइवेट नौकरी तो सबसे छोटा भाई गांव में रह कर ही खेतीबारी का काम करता है। हेमंत का निजी जीवन भी सादगी से भरा था। गांव वाले तारीफ करते नहीं थम रहे थे।