भोपाल के कमला प्रसाद स्मृति न्यास और बीएचयू कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को राधाकृष्णन सभागार में पांचवें कमला प्रसाद स्मृति पर ‘हाशिये का समाज और भारतीय आधुनिकता’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस मौके पर मुख्य वक्ता माला में कवि और समाजविज्ञानी प्रो. बद्रीनारायण ने कहा कि हाशिये का समाज एक परिवर्तनशील अवधारणा है।
उन्होंने कहा कि हमारी सामाजिक संरचना कुछ इस तरह की है जिसमे यह समाज ख़त्म नहीं हो सकता। यह लगातार बदलता रहता है आज जो मुख्य धारा में शामिल हैं उनमें से अनेक जातियां एक समय में हाशिये पर थीं।
उन्होंने आधुनिकता की पूरी प्रक्रिया को उपनिवेशवाद के साथ विकसित हुई परिघटना करार दिया और कहा कि यही बात भारतीय सन्दर्भ में भी लागू होती है।
कहाकि अगर भारत उपनिवेश न बना होता तो भारतीय आधुनिकता का स्वरूप क्या होता कहना मुश्किल है। इसके विकास को आधुनिकता कहा भी जाता या कुछ और नाम दिया जाता यह एक बहस का विषय है।
उन्होंने वैकल्पिक आधुनिकता और देशज आधुनिकता जैसे शब्दों पर अपनी बात की। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार प्रोफेसर काशीनाथ सिंह ने की।
इस मौके पर प्रो. बलराज पांडेय, प्रो. अवधेश प्रधान, आनंद वर्धन, नीरज खरे, युवा कवि व्योमेश शुक्ला, राजेंद्र शर्मा, दीनबंधु पाठक आदि ने काव्य पाठ भी किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष त्रिपाठी ने किया।