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जानिए स्वामी अग्निवेश ने किस बात के लिए दे डाली पूरे विश्व को चुनौती

Sun, 05 Nov 2017 10:51 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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स्वामी अग्निवेश - फोटो : अमर उजाला
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सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने अंधविश्वास और पाखंड समाप्त करने के लिए पूरे विश्व को शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी है। उन्होंने बताया कि 15 से 17 नवंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में विश्व वेद सम्मेलन में शास्त्रार्थ होगा।
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शुक्रवार को जगतगंज स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और समापन उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू करेंगे। इसमें कई वैज्ञानिकों समेत कनाडा, अमेरिका, अफ्रीका के विद्वान भी शामिल होंगे।

बताया कि सम्मेलन के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया गया है। काशी विद्वत परिषद एवं विश्वविद्यालय के छात्रों को बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि वेदों का संदेश देने का बीड़ा बनारस उठाए तो चमत्कार होगा। वेदों के बारे में भ्रम फैलाया गया है।
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वेदों में कहीं जातिवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि मांसाहार खत्म करके शाकाहार, नशामुक्ति की ओर जाना है तो वेदों की ओर लौटो। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए वेदों की ओर लौटो। अंधविश्वास और पाखंड मुक्त समाज बनाना है तो वेदों की ओर लौटो।  
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समझाया गया कुरान का उल्टा अर्थ 

quran
कुरान का भी उल्टा अर्थ लोगों को समझाया गया। तीन तलाक के मुद्दे पर कहा कि दुनिया के 22 मुस्लिम राष्ट्र तीन तलाक का विरोध कर रहे हैं। दिल्ली में प्रस्तावित सम्मेलन में मुस्लिम लड़कियां यज्ञ करेंगी।

फर्जी बाबाओं के सवाल पर स्वामी अग्निवेश ने कहा कि बाबा के वेश में आसाराम बापू ने जघन्य कुकृत्य किया। बाबा रामपाल अभी जेल में है। गुरमीत राम रहीम ने बलात्कार किया। इन पाखंडियों और धूर्तों ने आस्था के संसार को विकृत किया है।

ऐसे लोगों की शिनाख्त कर छंटाई की आवश्यकता है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के सवाल पर कहा कि यह नारा 2005 में मैंने दिया था। बाद में 2014 में यह नारा पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया।

भ्रूण की जांच करने वाले केंद्रों को बंद कर देना चाहिए। बेटा-बेटी में भेद करने वाले माता-पिता पापी हैं। बेटी के रजस्वला होने पर उसे अपवित्र बताया जाता है तो बेटों को मूंछ आने पर उसे अपवित्र क्यों नहीं मानते?
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