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सर्पदंश : एंटी स्नेक वेनम ही बचा सकती है जान

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गाजीपुर। जनपद में इन दिनों सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गईं हैं। वजह बारिश के कारण विषधर सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले इलाकों में जगह बनाने लगते हैं। ऐसे में वे कहीं से दब जाने पर डस लेते हैं। अप्रैल से अब तक 12 लोगों की सर्पदंश से मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश आठ मौतें जुलाई में हुईं। एक जुलाई से 13 जुलाई के बीच चार बच्चों की भी मौत हो गई। सर्पदंश की घटनाएं तब हुईं, जब बच्चे अपने बिस्तर पर गहरी नींद में सो रहे थे। वहीं, सीएमओ डॉ. देश दीपक पाल का दावा है कि सर्पदंश की घटना होने पर सीधे नजदीकी अस्पताल जाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हो। क्योंकि एंटी स्नेक वेनम ही लोगों की जान बचा सकती है। झांड़-फूंक के चक्कर में न पड़े।
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ऐसे घरों तक पहुंच जाते हैं विषधर
विश्व में सांपों की 216 प्रजातियां हैं। इनमें सिर्फ 52 प्रजातियां विषैले होती हैं। भारत में विशेषकर पूर्वांचल में कोबरा, करैत व बाइपर ही विषैले होते हैं। आमतौर पर सर्प खेतों में चूहों द्वारा बनाए गए बिल में रहते हैं। बारिश के सीजन में बिलों में पानी भर जाने से ये चूहों का पीछा करते हुए घरों तक पहुंच जाते हैं।
जब हमलावर दिखें सर्प तो करें ये काम
पक्षी विज्ञानियों के मुताबिक सर्प बहरा होने के कारण सुनते नहीं हैं। आंखों के सहारे हिलती-डुलती चीज को देखकर और धरती के कंपन के अनुमान पर आक्रमण करते हैं। जानकार बताते हैं कि जुलाई के महीने में कोबरा, करैत आदि सांपों का प्रजनन काल होता है। वह मादा के साथ जोड़े बनाते हैं तब आस-पास किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करते। ऐसे समय में वह आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में तीन माह तक विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सर्प जब हमलावर दिखें तो भागने की बजाय उस पर कपड़ा या रूमाल फेंकना चाहिए। जिससे वह उसमें फंस जाएं।
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सांप के डसने पर ये करें
सर्पदंश के बाद व्यक्ति को भागना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे रक्त का संचार बढ़ने से जहर तेजी से फैलने लगता है। घटना के बाद व्यक्ति को तुरंत बैठ जाना चाहिए और डसने वाले स्थान पर पांच से छह इंच ऊपर बांध देना चाहिए, ताकि जहर आगे न बढ़े। तत्काल पीड़ित को ऐसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए जहां एंटी स्नेक वेनम के अतिरिक्त सांस और दिल के सहायता संबंधी उपकरण उपलब्ध हों।
ये भी जानें
कोबरा आमतौर पर दिन में डसता है। इसके डसने वाले स्थान पर सूजन आ जाती है और असहनीय दर्द होता है। पीड़ित को आंखों से दिखना कम हो जाता है। बेहोश होने के साथ ही सांसों की गति कम हो जाती है और दिल काम करना बंद कर देता है। जबकि करैत रात को डसता है। इसके डसने पर सूजन नहीं होती। लोग मच्छर आदि के काटने की बात मानकर बेपरवाह हो जाते हैं। जब तक सर्प दंश का एहसास होता है हालत काफी बिगड़ जाती है।
केस नंबर 01

जमानियां क्षेत्र के कउमरगंज गांव निवासी सोहराव शाह की पुत्री रुखसार (10) की 10 जुलाई की रात सर्पदंश से मौत हो गई। रुखसार अपने कच्चे मकान में सोई हुई थी। रात ढाई बजे एक विषैले सांप ने उसे डस लिया। कुछ काटने की जानकारी उसने मां-पिता को दी। अंधेरा होने के कारण कहीं कुछ दिखा नहीं सभी लोग फिर सो गए। कुछ ही देर में उस सांप ने फिर से उसके बाएं हाथ के अंगूठे में डस लिया। परिजन उसे झाड़फूंक के लिए कसेरा गांव ले गए। वहां आराम नहीं मिलने पर उसे पीएचसी ले गए फिर वहां से राजकीय मेडिकल काॅलेज के अस्पताल रेफर किया गया। वहां से वाराणसी रेफर किया गया,लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

केस नंबर 02
भांवरकोल क्षेत्र के नकटीकोल में 6 जुलाई की रात मुनालिका (4) तीन बहनों एवं एक भाई के साथ मां पूनम देवी के साथ चौकी पर सो रही थी। इस दौरान उसे सर्प ने डंस लिया। इसकी जानकारी बालिका ने मां को दी। मां ने कहा, चूहे ने काट लिया होगा। इसके बाद पुन: सो गई। एक घंटे बाद बालिका को उल्टी और चक्कर आने लगा। परिजन उसे मऊ ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
केस नंबर 03

दिलदारनगर गांव में 1 जुलाई की रात कार्तिक रूद्र सिंह (17) छोटे भाई देवव्रत और बहन मधु के साथ सो रहा था। रात 2.30 बजे देवव्रत ने मात-पिता को उठाकर बताया कि भाई की तबीयत खराब हो गई। पता चला कि सोते समय कार्तिक रूद्र को सांप ने डस लिया था। उसे निजी अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भी परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए ले गए लेकिन उन्हें निराशा ही मिली।
केस 4
जमानिया कोतवाली क्षेत्र के कसेरा गांव में 13 जुलाई को अंकित (13) खाना खाने के बाद रात में सोने गया। देर रात 12.30 बजे अंकित ने मां मेनका को जगाया और कहा कि सांप ने डस लिया है। परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए ले गए। हालत नहीं सुधरी तो मेडिकल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने बालक को मृत घोषित कर दिया।

एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। जिले के सभी सीएचसी पर 20-20 वायल और पीएचसी पर 10-10 वायल एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन है। इसके अलावा 500 से अधिक वायल स्टोर में है। सर्पदंश की घटना के बाद सीधे अस्पताल आकर उपचार कराएं, झाड़फूंक से दूर रहें।- डॉ. देश दीपक पाल, सीएमओ
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