रविवार की शाम को कजरी महोत्सव में सबसे पहले रेवती साकलकर ने गणेश वंदना से श्रीगणेश किया। इसके बाद उन्होंने पहला गीत धीरे-धीरे सावन घर लागी... की तान जब छेड़ी तो पूरा हाल श्रावणी फुहार को अंतस में महसूस कर रहा था। इसके बाद मिर्जापुर की कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव ने मंच संभालते ही मिर्जापुरी कजरी की धुन से श्रोताओं को हर अंतस को रससिक्त कर दिया। उर्मिला ने पारंपरिक कजरी गीत हमको सावन में झूलनी करा द पिया... के जरिये प्रियतमा की अठखेलियों को सजीव किया।
दूसरा गीत मिर्जापुर भईल गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कईला बलमू..., सेजिया पे लोटे काला नाग हो, कचौड़ी गली सून कईला बलमू... की धुन छेड़ी तो हर अंतर्मन में प्रेम और विरह के राग खुद ब खुद बज उठे। उन्होंने कईसे खेले जईबू सावन में कजरिया, बदरिया घिर आईल ननदी...के बाद समापन उन्होंने मेंहदी लिया दा मोती झील से...किया।
तीसरी और अंतिम प्रस्तुति में डॉ. सोमा घोष ने मंच संभाला। गगन मरदल बाजे धमधम बादर नटवर नाचे छमछम...के जरिये भगवान शिव की आराधना की। इसके बाद हम सावन की बदरी तुम आषाढ़ की घटा मिलजुल बरसत काहे नाहीं रे.... के जरिये शिव शक्ति को प्रतिष्ठित किया। रिमझिम बरसेला बदरिया, सखिया गावेली कजरिया... को अपनी खनकती आवाज में सुर दिया तो पूरा रुद्राक्ष का हाॅल उनकी मधुर आवाज का कायल हो उठा।