विज्ञान और तकनीक के सहारे जल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों को दूर करने में लगे देश के भावी इंजीनियरों की ओर से हैकथॉन में तैयार की जा रही नई तकनीक विकास का मॉडल बनेगी।
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लगातार 36 घंटे तक चलने वाले ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2018’ में देश भर के 43 कॉलेजों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इंटरनेट के माध्यम से इसके लिए अलग-अलग साफ्टवेयर और मोबाइल एप बनाया।
हैकथॉन में आने वाले सुझावों के आधार पर ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय आगे चलकर न केवल शोध कराएगा बल्कि इसको अमल में लाया जाएगा। बीएचयू के एंफीथिएटर मैदान के इंडोर ऑडिटोरियम में दो दिन तक चले इस बड़े आयोजन में भावी इंजीनियरों ने अपनी दक्षता के माध्यम से जल संरक्षण, भूमिगत जल प्रबंधन, जल की गुणवत्ता, जल का स्तर घटने जैसी समस्याओं का निष्कर्ष निकाला।
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इसमें न केवल शुद्ध जल बल्कि किस जगह पर कितनी आर्सेनिक की मात्रा है, इसका पता लगाने के लिए अलग तरीके का साफ्टवेयर भी बनाने की दिशा में प्रोजेक्ट बनाया। तमिलनाडू, दिल्ली, उड़ीसा, भोपाल, आदि जगहों से आए प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था।
इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से छात्रों को संबोधित कर उन्हें देश के विकास के लिए आगे आने का आह्वान किया था। इसके लिए उन्होंने विज्ञान और तकनीक में दक्षता हासिल करने के लिए प्रेरित किया था।
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महाराष्ट्र की टीम किलर कोड ने मारी बाजी
विजेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
- फोटो : अमर उजाला
दो दिवसीय स्मार्ट इंडिया हैकथॉन में बने स्टार्ट अप के साथ ही साफ्टवेयर, एप के मूल्यांकन के आधार पर महाराष्ट्र की टीम किलर कोड को पहला स्थान मिला।
इस टीम के सदस्यों ने हर खेत को पानी प्रोजेक्ट बनाकर न केवल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा बल्कि चुनौतियों के बावजूद पहला पुरस्कार छीन लिया। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लाख रुपये नगद पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
एंफीथिएटर इनडोर आडिटोरियम में आयोजित समापन समारोह में इसके अलावा मुंबई के बगस्कुशर्स को दूसरा और भोपाल की टेकविजाडर्स ने तीसरा स्थान हासिल किया। दोनों टीमों को क्रमश: 75 और 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिला।
मेघवाल ने इस दौरान विजेताओं के साथ ही सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि तकनीकी रुप से दक्षता हासिल कर ही हम इस तरह की चुनौतियों से निपट सकते हैं। कहा कि पूर्व की सरकारों ने जल प्रबंधन, जल संरक्षण सहित जनहित की योजनाओं की अनदेखी की।
फाइल केवल एक विभाग से दूसेर विभाग तक लौटती रहती थी। प्रासेस होता था लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं। इस दौरान डायरेक्टर गिरिराज गोयल, मंत्रालय से प्रदीप कुमार बंसल, एआईसीटीई डॉ. प्रताप सनप, बीएचयू कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, संयोजक डॉ. कविता शाह, सह संयोजक बीसी कापरी आदि मौजूद रहे। 5 अन्य टीमों को प्रोत्साहन पुरुस्कार भी दिया गया।
हैकथॉन में डांस करते छात्र छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
एक साथ देश के 22 केंद्रों पर चल रहे हैकथॉन में आए छात्र-छात्राओं ने 36 घंटे का सफर तय करने के साथ ही अलग-अलग कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़कर भागीदारी की। इसमें शुक्रवार देर रात जुंबा डांस के माध्यम से हैकथॉन के मंच पर सभी प्रतिभागी थिरकते नजर आए।
गीत-संगीत के इस कार्यक्रम का उद्देश्य तनाव दूर कर अपने मिशन में आगे बढ़ते रहना था। वहीं शनिवार सुबह योग की अलग-अलग विधाओं के माध्यम से स्वस्थ रहने का संकल्प लिया।
आडिटोरियम में अलग-अलग स्टॉल पर अपनी टीम के साथ लगे भावी इंजीनियरों ने 36 घंटे तक जल प्रबंधन, जल संरक्षण आदि के मुद्दे पर क्या-क्या प्रोजेक्ट तैयार किए, उसका आने वाले समय में किस तरह से बेहतर उपयोग किया जा सकता है, इसका मूल्यांकन निर्णायकों ने किया।
इसमें कुछ स्थानीय तो कुछ बाहर के तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के कार्यों का मूल्यांकन किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने निर्णायकों के सवालों का बखूबी जवाब भी दिया।