जिले के ग्रामीण इलाकों में लगभग सभी परिषदीय विद्यालयों में बच्चे जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठकर ही पढ़ते हैं। सेवापुरी विकास खंड क्षेत्र में कुल 111 प्राथमिक व 37 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। ब्लॉक के किसी भी प्राइमरी स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं है। सिर्फ पांच माध्यमिक विद्यालयों में डेस्क और बेंच की व्यवस्था है। यह व्यवस्था भी सभी बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। प्राइमरी व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे टाट-पट्टी पर ही बैठकर पढ़ाई करते हैं। खंड शिक्षाधिकारी बीके श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले दिनों स्कूलों में डेस्क और बेंच के लिए शासन के निर्देश पर बीएसए द्वारा स्कूल और बच्चों की संख्या मांगी गई थी। रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
रोहनिया क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी टाट-पट्टी पर ही बैठते हैं। चौबेपुर क्षेत्र के गांवों के प्राथमिक विद्यालयों के नौनिहाल इस कड़ाके की ठंड में भी फटी-पुरानी टाट पट्टी पर बैठने को विवश हैं। पिंडरा ब्लॉक के 132 प्राथमिक व 48 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में तकरीबन 20 हजार छात्रों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं तो कई स्कूलों में तो शिक्षक भी नहीं हैं। एबीएसए अशोक सिंह ने बताया कि वर्ष 2008 में कुछ पूर्व माध्यमिक स्कूलों में बेंच-डेस्क आई थीं लेकिन अब वे भी टूटकर किसी काम लायक नहीं बचीं।
प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने की व्यवस्था को लेकर भले ही हाईकोर्ट सख्त हो गया हो लेकिन आज भी कड़कड़ाती ठंड में सरकारी स्कूलों में टाट-पट्टियां ही बच्चों का सहारा है। बात सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों की नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में भी यही हालात हैं। प्राथमिक कन्या पाठशाला मलदहिया, प्राथमिक स्कूल जगतगंज, प्राथमिक विद्यालय माता प्रसाद बड़ी बाजार इसके उदाहरण हैं। हालांकि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जहां सामाजिक संस्थाओं ने टेबल-कुर्सियां उपलब्ध कराई हैं। करीब 20 दिन पहले हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया था। इसे लेकर शासन पूरे प्रदेश के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में टेबल-कुर्सियों का सर्वे करा रहा है। बीएसए जयकरण यादव ने बताया कि जिले में 1014 प्राइमरी व 354 मिडिल स्कूलों में सर्वे हो रहा है। पूरा होने में 10 दिन का वक्त लगेगा। पूरा एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा। बजट आने के बाद टेबल व कुर्सियों की व्यवस्था की जाएगी।