समाज में पुरुष वर्ग को ही मुखाग्नि देने के मान्यता है, लेकिन एक बहन ने इस मान्यता को तोड़ते हुए जिद की और भाई को मुखाग्नि देकर यह साबित किया कि रिश्ता के महत्व है, मान्यताओं का नहीं। मामला यूपी के बलिया जिले का है।
जिले के गड़वार थाना क्षेत्र के पांडेयपुर निवासी ओमप्रकाश पांडेय की मृत्यु शनिवार को हो गई। अंतिम संस्कार के दौरान उसकी बहन ने जिद कर भाई को मुखाग्नि दी। जबकि उसके चचेरे भाई व चाचा ने ऐसा नहीं करने के लिए बात कहा लेकिन बहन की जिद के आगे उनकी एक नहीं चली।
सूर्यनाथ पांडेय तीन भाई थे। सूर्यनाथ की पांच संतानें थी। जिसमें तीन पुत्र व दो पुत्रियां थीं। जिनकी गृहस्थी ठीकठाक चल रही थी। बताया जाता है कि पुत्र दिग्विजय छोटी आयु में ही कहीं चला गया, जो आज तक लौटकर नहीं आया। इसके बाद करीब एक दशक बाद माता-पिता की मृत्यु हो गई।
तत्पश्चात दूसरे पुत्र दामोदर 32 की करीब तीन वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। वहीं बीमार चल रहे ओमप्रकाश पांडेय 40 की भी शनिवार को मौत हो गई। जिसके अंतिम संस्कार के दौरान उसकी बहन आरती ने गंगा घाट जाकर भाई को मुखाग्नि दी। जबकि इसके पूर्व गांव के प्रबुद्धजन एवं चाचा प्रद्युम्न पांडेय ने आरती को काफी समझाया।
बड़ी बहन गीता पांडेय तो इस बात पर राजी हो गईं कि चाचा ही श्राद्ध कर्म करेंगे, लेकिन छोटी बहन आरती अपने जिद पर अड़ी रही। अंत में आरती ने ही मुखाग्नि दी। इस बाबत बहन गीता ने बताया कि बहन आरती की इच्छा थी, उसे पूर्ण कराया गया। लेकिन श्राद्ध कर्म चाचा प्रद्युम्न पांडेय ही करेंगे।