बताते चलें कि हमीदपुर सड़क पर रिहायशी मकान में संचालित फातमा क्लीनिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नदवासराय से महज 800 मीटर की दूरी एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़राव से 8 किलोमीटर की दूरी पर संचालित था।
गंगुआबारी निवासी राजन चौहान ने बताया कि अपनी गर्भवती पत्नी अर्चना चौहान को जांच के लिए वह इस अस्पताल पर बुधवार की देर रात पहुंचा था। जहां मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद सुरक्षित प्रसव कराने का दावा करते हुए उसे भर्ती करा लिया। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने महिला के परिवार को भरोसा दिलाया था कि वह बिना ऑपरेशन के सामान्य प्रसव करा देगा।
बृहस्पतिवार की सुबह दस बजे के करीब प्रसव के दौरान बच्चे का जन्म तो हुआ, लेकिन नवजात मृत अवस्था में था। उसके बाद महिला की भी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई, जहां महिला की मौत हो गई। उधर घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल संचालक अपने क्लीनिक का बैनर-पोस्टर हटाकर अस्पताल बंद कर फरार हो गया।
इससे नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने महिला व नवजात के शव को नदवासराय बाजार के मुख्य सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। सड़क जाम होने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सूचना मिलने पर एसडीएम घोसी अशोक सिंह, सीओ घोसी जितेंद्र सिंह मौके पर पहुंचकर इस मामले में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिसके करीब एक घंटे बाद परिजनों ने जाम हटाया। उधर इस घटनाक्रम के बाद सीएचसी बड़राव प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने संबंधित अस्पताल को सीज करने की कार्रवाई की।