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आस्था: चार साल के केशव, कक्षा तीन तक पढ़ीं ललिता पढ़ रहीं गीता के कठिन श्लोक, जन्माष्टमी पर गूंजेंगे मंत्र

Wed, 02 Sep 2026 03:13 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

चार साल के केशव और कक्षा तीन तक पढ़ीं ललिता गीता के कठिन श्लोक पढ़ रहीं हैं। अभिभावकों संग हमेशा सत्संग व पूजा में शामिल होकर बच्चे व महिलाएं मंत्रों व श्लोकों का कंठस्थ किया। वे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर होने वाले अनुष्ठानों के मंत्रों का भी स्वर करेंगे। 
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केशव, संस्कार, अमन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार साल के केशव, कक्षा तीन तक पढ़ी ललिता भागवत गीता और देवों के कठिन मंत्रों का वाचन शुद्ध रूप में कर रही हैं। ऐसे 19 बच्चे हैं जिनकी उम्र चार से 14 साल तक हैं। 60 महिलाएं हैं, जो कम पढ़ी-लिखी हैं। बावजूद धारा प्रवाह श्लोकों को पढ़ती हैं। हर रविवार को अभिभावकों के साथ नित्य सत्संग में शामिल होते हैं। वह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर होने वाले अनुष्ठानों के मंत्रों का भी स्वर करेंगे।

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हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी की ओर से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी तेज हो गई है। माहेश्वरी भवन महमूरगंज में तीन से पांच सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसमें देशभर श्रद्धालु आएंगे। कान्हा की भक्ति में लीन रहेंगे। सोसाइटी के आयोजन में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक प्रभु की भक्ति-भजन करेंगे। 

सोसाइटी के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद दास ने बताया कि संस्था के जुड़कर प्रभु सेवा में सैकड़ों भक्त जुड़े हैं। केशव चार वर्ष, आयुष पांच वर्ष, अमन छह वर्ष, साक्षी आठ वर्ष के हैं, जो अपने माता-पिता और अभिभावकों के साथ बचपन से ही आने से उनको गीता, वैष्णों प्रणामंत्र, नृसिंह मंत्र, प्रभुपाद प्रणति महामंत्र, तुलसी मंत्र का सस्वर पाठ फार्राटे के साथ करते हैं। बताया कि ऐसे ही महिलाएं भी हैं जो कम पढ़ी-लिखी हैं। 
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ललिता, स्वेता, किशोरी देवी, रितु, अनीता कक्षा तीन से पांच तक पढ़ी हैं। मगर, हमेशा प्रभु के सत्संग, पूजन अनुष्ठान में शामिल होने मात्र से उनको इन सभी मंत्र कंठस्थ है। ललिता 70 साल की है। उन्होंने बताया कि प्रभु के भक्तों में प्रोफेसर व डॉक्टर भी हैं, जो अनुष्ठान के मंत्रों और गीता का पाठ करते हैं।

बच्चे नृसिंह और महिलाएं करती हैं तुलसी आरती
कृष्ण प्रसाद दास ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अलग-अलग पूजा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। बच्चे नृसिंह भगवान की पूजा व आरती करते हैं तो तुलसी पूजा महिलाएं करती हैं। पुरुष इन पूजा में शामिल होते हैं। हरिनाम संकीर्तन भी महिलाएं और पुरुष अलग-अलग करते हैं।

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