चाचा से 1200 रुपये लेकर पहुंचे गांधी नगर
साई सेंटर गांधी नगर जाने के लिए पैसे नहीं थे। चाचा से 1200 रुपये लेकर बिजनौर से गांधी नगर गया। जनरल टिकट लेकर मुजफ्फर नगर से ट्रेन में सवार हुआ। भीड़ होने के कारण सीट पर जगह नहीं मिली तो दो बोगियों के बीच बैठ गया। डर के मारे रातभर नींद नहीं आई। साई सेंटर पहुंचकर 1000 रुपये बतौर काॅशन मनी जमा कराए तब से खेलने का सफर शुरू हुआ।
2012 में यूपी टीम में मिली जगह
राहुल चौधरी ने बताया कि 2012 में यूपी टीम में चयनित हुआ। इसकी राष्ट्रीय प्रतियोगिता फैजाबाद में खेली गई। प्रदर्शन के आधार पर वहां से नॉर्थ जोन हरिद्वार के लिए खेला। इसमें उत्तराखंड के खिलाफ हुए फाइनल में मुझे अंतिम पांच मिनट के लिए खेलने का मौका मिला। उस समय टीम हार रही थी।
मैन पहली रेड में तीन अंक लेकर टीम को जीत दिलाई। इसके बावजूद भी मुझे मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय मुकाबले में टीम में शामिल होने के बाद भी मैच में नहीं खिलाया गया। इसके बाद 2013 में मुझे राष्ट्रीय टीम में मुख्य रेडर के तौर पर खेलने का मौका मिला। दक्षिण भारत में मुकाबला हुआ और टीम को तीसरा स्थान मिला। 2015 में यूपी टीम में बतौर कप्तान खेला और टीम को स्वर्ण जिताया। 2014 से लगातार दस सीजन तक बेस्ट रेडर रहा।
पढ़ाई से लगता था डर
घर में बड़े भाई और पिता खेलने पर डांटते और पढ़ाई करने के लिए कहते थे, लेकिन मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था। कभी दौड़ कभी क्रिकेट भी खेला करता था। साई में कठिन प्रशिक्षण से घर भागने का मन करता था लेकिन पढ़ाई और घर की डांट से मैं गांधी नगर साई सेंटर में रहा।