Varanasi News: वर्षा पिता के काम में भी सहयोग करती थीं, लेकिन उसे जल्द से जल्द निपटाकर खेलने जाती थीं। उन्होंने पहला पदक 2016 में जीता। गांव और स्कूल में तारीफ मिलने पर पिता ने उन्हें आगे खेलने की अनुमति दे दी।
भतसार निवासी वर्षा ने पड़ोस की दीदी को जेवलिन थ्रो खेलते देखा तो खेल में रोचकता बढ़ी। दर्जी पिता से खेलने की इच्छा जताई। घर की माली हालत ठीक नहीं थी इसलिए पिता ने कहा घर के काम में हाथ बंटाओ, पढ़ो-लिखो, खेल में क्या रखा है। लेकिन समय निकाल वर्षा ने खेलना शुरू किया और अब तक कुल 23 पदक जीत चुकी हैं।
विज्ञापन
2015 में 14 वर्ष की आयु में गांव के मैदान से खेल की शुरूआत करने वाली वर्षा चार बहनों में सबसे छोटी हैं। वह साइकिल से घर से करीब तीन किलोमीटर दूर कोटवा जाकर लालचंद राम के निर्देशन में खेल के पैतरे सीखने लगीं।
सूरजपति कन्या इंटर कॉलेज से दसवीं पास करने के बाद 2016 में विशाखापत्तनम और कोयंबटूर में हुई अंडर-16 नेशनल प्रतियोगिताओं में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीता। 2017 में साई सेंटर के लिए ट्रायल दिया और चयनित हो गईं। आजकल वे साई कोच के निर्देशन में तीन घंटे सुबह और शाम बीएचयू एथलेटिक्स मैदान पर अभ्यास करती हैं।
विज्ञापन
एक साल तक खेल से रही दूरीं वर्षा का प्रदर्शन बुलंदियों पर था लेकिन फरवरी 2018 में भाला फेंकते समय कंधे में खिंचाव आ गया। इस वजह से करीब एक वर्ष तक वेे ट्रैक से बाहर रहीं।
इसके बाद लॉकडाउन लगने से दो साल तक कोई खेल गतिविधि नहीं आयोजित हुई। वहीं, 2022 के बाद लगातार विभिन्न प्रतियोगिताएं में पदक जीत रही हैं। बीते सप्ताह ही लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है।