वाराणसी। सपा एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने कैबिनेट द्वारा मंजूर नई शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करते हुए इसे सरकार का विजन डॉक्यूमेंट बताया है। कहा कि यह ऐसा विजन डॉक्यूमेंट है, जो शिक्षा व्यवस्था की जड़ता को तोड़ने का आह्वान करता है लेकिन इसका सही मूल्यांकन तब होगा, जब इसे भारत के विभिन्न राज्यों में लागू किया जाएगा और इस बाबत कानून भी बनाए जाएंगे।
सपा एमएलसी ने कहा कि किसी भी ने नेशन स्टेट (गणराज्य) की जिम्मेदारी है कि वह अपने निवासियों के स्वास्थ्य और शिक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन करें और जीडीपी का 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करें। बताया कि इस नीति में पूर्व स्कूलिंग की उम्र 3 वर्ष निर्धारित की गई है, जो बहुत कम है। इसे कम से कम 4 वर्ष से शुरू होनी चाहिए। शतरूद्र प्रकाश ने बताया कि जहां तक हाईस्कूल और इंटर का सवाल है, तो दोनों के कोर्स एक वर्ष के होने चाहिए। नई शिक्षा नीति में रटंत शिक्षा को समाप्त करने का आह्वान तो है, लेकिन विद्यार्थियों की परीक्षा कैसे ली जाएगी, स्पष्ट नहीं है। विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने देश में शाखाएं खोलने के लिए जरूर आमंत्रित किया गया किंतु तय नहीं है कि फीस और पाठ्यक्रम कौन तय करेगा। शतरूद्र प्रकाश ने कहा कि यह शिक्षा नीति पूर्व के अन्य आयोगों जिनमें कोठारी आयोग, नई शताब्दी की शिक्षा नीति की तरह सिर्फ कागजी बनकर रह जाएगी या सस्ती और सुलभ शिक्षा का द्वार खोलेगी, यह स्पष्ट होना चाहिए।