कड़ाके की ठंड से अाम जन-जीवन को शनिवार को भी राहत नहीं मिली। सुबह से बादल छाए रहे। बर्फीली हवाएं बदन बेधती रहीं। दोपहर के वक्त कुछ पलों के लिए सूर्यदेव के दर्शन तो हुए लेकिन गरमाहट बादलों के घेरे से बाहर नहीं निकल पाई। ठंड की मार ने निर्माण कार्यों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
चाहे निजी भवनों के निर्माण हों या फिर सरकारी स्तर पर कार्यदायी संस्थाओं की परियोजनाएं। मजदूरों के न निकलने से काम पर प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। गुरुधाम और सोनारपुरा चौराहों पर जहां पौ फटते ही मजदूरों की भीड़ लग जाती थी, वहीं शनिवार को वहां सन्नाटा छाया रहा। सर्दी को देखते हुए लोगों ने निर्माण संबंधी कार्यों को अगले हफ्ते के लिए टाल दिया है।
शहर में लोहे की आलमारी, खिड़कियां, दरवाजे और शटर बनाने वाले भी आर्डर न मिलने से परेशान हैं। मानसरोवर घाट के दामोदर यादव खोजवा में अपने भवन के निर्माण की शुरुआत करने वाले थे लेकिन ठंड के चलते तैयारी धरी रह गई। अब उन्हें तीन दिन से मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं।
सोनारपुरा देवव्रत भट्टाचार्य को पाइप लाइन का काम करना था लेकिन उन्होंने भी अपनी इस योजना को टाल दिया है। शनिवार को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस पर आने से लोगों की मुश्किल और बढ़ गई।
सतह पर 8-10 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पछुआ हवाएं चल रही हैं। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि फिलहाल पूर्वांचल में गलन से निजात मिलने के संकेत नहीं हैं।