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UP: मानव तस्करी में दो महिलाओं सहित सात दोषियों को उम्रकैद, नाबालिग को 10 साल की सजा; जुर्माना भी लगाया

Tue, 25 Nov 2025 10:24 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र में 16 मई 2023 को बच्चे के गायब होने की सूचना दर्ज कराई थी। सीसीटीवी के अनुसार, पुलिस ने जांच की तो मामला मानव तस्करी का निकला। दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।
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वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Varanasi Crime News: मानव तस्करी और बच्चा चोरी करके बेचने के मामले में फास्ट ट्रैक प्रथम के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दो महिलाओं शिखा और सुनीता देवी सहित सात दोषियों संतोष गुप्ता, मनीष जैन, महेश राणा, मुकेश पंडित, महेश राणा को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। 

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साक्ष्यों की कमी के चलते मामले से नौ आरोपियों को बरी कर दिया गया। वहीं, विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट की अदालत ने इसी मामले में एक नाबालिग को दस साल की सजा सुनाई। अदालत ने उसपर छह हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाते वक्त अदालत ने कहा कि दोषी की उम्र भले ही 15 साल है लेकिन उसकी सोच और क्रियाकलाप वयस्कों जैसे हैं इसलिए सजा जरूरी है। नाबालिग मंडुवाडीह थानाक्षेत्र के शिवदासपुर का रहने वाला है। उसे बाल सुधार गृह भेजा गया है। नाबालिग को संतोष के साथ ही पकड़ा गया था।

मामला भेलूपुर थाना क्षेत्र का है। 16 मई 2023 को सामने घाट लंका निवासी संजय ने भेलूपुर थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। संतोष ने पुलिस को बताया था कि वह अपनी पत्नी और चार साल के बेटे के साथ रविंद्रपुरी कॉलोनी के पास डिवाइडर के बीच में मच्छरदानी लगाकर सोया था। सुबह उठा तो, बेटा लापता मिला। 

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बच्चे को सोते वक्त उठा ले गए थे

पुलिस ने सीसी कैमरे की जांच की। इससे पता चला कि स्कॉर्पियो सवार बच्चे को उठाकर ले गए हैं। जांच आगे बढ़ी तो बच्चों को चोरी करके दूसरे राज्यों में बेचने और मानव तस्करी का मामला सामने आया। पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक मंडुवाडीह निवासी संतोष और उसके नाबालिग सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने झारखंड में छापा मारा और रविंद्रपुरी से लापता सहित चार बच्चों को बरामद कर लिया। पुलिस को तीन और बच्चे मिले थे। इनमें से एक बच्चा प्रयागराज का था। सभी को भेलूपुर पुलिस को सौंपा गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। 

अभियोजन ने प्रभावी पैरवी की। इसी का नतीजा रहा कि फास्ट ट्रैक प्रथम के न्यायाधीश की अदालत ने 21 नवंबर को ही मामले में आरोप तय कर दिए। साथ ही 24 नवंबर को सजा सुनाने की तिथि तय कर दी। सोमवार को दोषी पाए गए सात लोगों को सजा सुनाई गई।

झारखंड के अस्पताल से बनता था फर्जी प्रमाण पत्र : मानव तस्करी का गिरोह झारखंड, राजस्थान के साथ ही यूपी के कई जिलों तक फैला था। शिवदासपुर निवासी संतोष गुप्ता ने रविंद्रपुरी से जिस बच्चे को उठाया था, उसे दो दिन तक लोहता में सुनीता देवी के यहां रखा गया था। यहीं से उसे झारखंड भेजा गया। जिन बच्चों को उठाया जाता था उनका फर्जी जन्म प्रमाण पत्र झारखंड के कोडरमा स्थित अस्पताल से बनवाया जाता था। 
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बच्चों से अपराध में पहली बार मिली उम्रकैद की सजा
अभियोजन का दावा है कि बच्चों और मानव तस्करी से जुड़े मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा पहली बार मिली है। कैंट, चेतगंज सहित तीन थाना क्षेत्रों से जुड़े मामले अब भी अदालत के विचारधीन हैं। ट्रायल चल रहा है। इन मामलों में अदालत जल्द ही आरोप तय कर सकती ह
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