पुलिस ने सीसी कैमरे की जांच की। इससे पता चला कि स्कॉर्पियो सवार बच्चे को उठाकर ले गए हैं। जांच आगे बढ़ी तो बच्चों को चोरी करके दूसरे राज्यों में बेचने और मानव तस्करी का मामला सामने आया। पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक मंडुवाडीह निवासी संतोष और उसके नाबालिग सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।
दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने झारखंड में छापा मारा और रविंद्रपुरी से लापता सहित चार बच्चों को बरामद कर लिया। पुलिस को तीन और बच्चे मिले थे। इनमें से एक बच्चा प्रयागराज का था। सभी को भेलूपुर पुलिस को सौंपा गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
अभियोजन ने प्रभावी पैरवी की। इसी का नतीजा रहा कि फास्ट ट्रैक प्रथम के न्यायाधीश की अदालत ने 21 नवंबर को ही मामले में आरोप तय कर दिए। साथ ही 24 नवंबर को सजा सुनाने की तिथि तय कर दी। सोमवार को दोषी पाए गए सात लोगों को सजा सुनाई गई।
झारखंड के अस्पताल से बनता था फर्जी प्रमाण पत्र : मानव तस्करी का गिरोह झारखंड, राजस्थान के साथ ही यूपी के कई जिलों तक फैला था। शिवदासपुर निवासी संतोष गुप्ता ने रविंद्रपुरी से जिस बच्चे को उठाया था, उसे दो दिन तक लोहता में सुनीता देवी के यहां रखा गया था। यहीं से उसे झारखंड भेजा गया। जिन बच्चों को उठाया जाता था उनका फर्जी जन्म प्रमाण पत्र झारखंड के कोडरमा स्थित अस्पताल से बनवाया जाता था।
बच्चों से अपराध में पहली बार मिली उम्रकैद की सजा
अभियोजन का दावा है कि बच्चों और मानव तस्करी से जुड़े मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा पहली बार मिली है। कैंट, चेतगंज सहित तीन थाना क्षेत्रों से जुड़े मामले अब भी अदालत के विचारधीन हैं। ट्रायल चल रहा है। इन मामलों में अदालत जल्द ही आरोप तय कर सकती ह