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UPSC में काशी के 7 मेधावी: इनमें 4 बेटियां और 3 बेटे; सफलता की ऐसी इबारत लिखी, मां-पिता का सिर और ऊंचा हो गया

Wed, 17 Apr 2024 03:44 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

UPSC Result 2023: संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में काशी के सात मेधावियों ने अपनी प्रतिभा साबित की है। इनमें चार बेटियां और तीन बेटे शामिल हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सफलता की इबारत तो लिखी ही अपने मां-पिता का सिर भी फख्र से ऊंचा कर दिया। 
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आकांक्षा सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इन मेधावियों ने युवाओं को यही सबक दिया कि तैयारी शुरू करने से पहले दूसरों की हर बात सुन लो और उस पर विचार करो। लेकिन, एक बार मन बनाकर तैयारी शुरू कर दो तो फिर किसी की मत सुनो। वरना, भटक जाओगे, कहीं नहीं पहुंच पाओगे...।

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रांची विवि की असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं आईएएस
बड़ालालपुर चांदमारी स्थित वीडीए कॉलोनी निवासी आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 44वीं रैंक हासिल कर काशी का मान बढ़ा दिया। अपनी मेहनत से उन्होंने सफलता की वो इबारत लिखी जिसे हर किसी ने सलाम किया।

आकांक्षा के पिता चंद्र कुमार सिंह मूल रूप से आजमगढ़ के बूढ़नपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता झारखंड कैडर के पूर्व पीसीएस अधिकारी हैं। आकांक्षा शुरू से ही पढ़ाई में आगे रहीं। जमशेदपुर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने मिरांडा हाउस दिल्ली से यूजी किया। 
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इसके बाद जेएनयू से भूगोल विषय में पीजी किया। इस समय वह रांची विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उनका भाई भी इंजीनियरिंग करने के बाद सिविल की तैयारी कर रहा है। आकांक्षा के पिता चंद्रकुमार ने कहा कि रामनवमी के मौके पर परिवार को जो खुशी मिली है, वह प्रभु की देन है। कहा कि आकांक्षा शुरू से ही धुन की पक्की थी।

इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ की तैयारी

परिवार के साथ अरफा उस्मानी। - फोटो : अमर उजाला
दालमंडी में क्रॉकरी की दुकान चलाने वाले मच्छोदरी के कोयला बाजार निवासी असलम खान की बेटी अरफा उस्मानी ने 111वीं रैंक हासिल की है। 2018 में आईआईटी बीएचयू से मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग में इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री करने के बाद इंटेल कंपनी में दो साल तक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की जॉब की। मगर, मन में यूपीएससी करने की इच्छा दबी रही। 

आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई कर रिजर्व बैंक में जॉब कर रहे बड़े भाई से प्रेरित होकर अरफा ने जॉब छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में लग गईं। चौथे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर दिया। उन्होंने कहा पहले प्रयास में कोचिंग ली थी, मगर उसके बाद सेल्फ स्टडी ही काम आई। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी अरफा ने 2010 में सेंट जॉन्स मढ़ौली से पूर्वांचल टाॅप किया था। उन्होंने कहा कि दबाव में रहकर पढ़ाई न करें। यूपीएससी के लिए धैर्य की जरूरत होती है।
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बिना कोचिंग के हासिल की 121वीं रैंक

परिवार के साथ शाश्वत अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला
बनारस के सूटकेस व्यवसायी राजेश और दिव्या अग्रवाल के दूसरे बेटे शाश्वत अग्रवाल ने अपने दम पर तीसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से स्नातक और जेएनयू से परास्नातक की पढ़ाई करने के बाद वह तैयारी में लगे रहे और तीसरे प्रयास में सफल हो गए। 

उनकी मां दिव्या अग्रवाल ने बताया कि उसे कोचिंग की मदद लेने के लिए कहा गया तो उसने सीधे मना कर दिया। कहा कि मम्मी मैं खुद से तैयारी करना चाहता हूं और निरंतर लगा रहा। शाश्वत पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। स्कूल से लेकर कॉलेज तक वह बेहतर प्रदर्शन करते रहे। पहले प्रयास में प्रीलिम्स भी नहीं निकला तो थोड़ी निराशा हुई। दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स निकला और तीसरे प्रयास में 121वीं रैंक। उन्होंने कहा कि वह आगे भी बेहतर करने का प्रयास करते रहेंगे। बड़े भाई बिजनेस करते हैं और बहन सीए हैं।
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