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Varanasi News: ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दे दिया सुरक्षा एजेंसी का ठेका, जांच शुरू

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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इसमें विश्वविद्यालय ने काली सूची में दर्ज सुरक्षा एजेंसी से अनुबंध कर लिया है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी व कुलपति से की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संयुक्त शिक्षा निदेशक के पत्र के बाद इस मामले में जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
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कुलसचिव राकेश कुमार के अनुसार संयुक्त शिक्षा निदेशक के पत्र के बाद लोक शिकायत के मामले में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। जांच समिति का अध्यक्ष जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह को बनाया गया है। सदस्यों में पूर्व जिला जज उमेश चंद्र मिश्र व उपकुलसचिव केशलाल हैं। शिकायतकर्ता आरके तिवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि जेम पोर्टल पर निविदा की वैधता की समाप्ति के बाद बिना किसी निविदादाताओं को सूचित किए विनयाधिकारी ने समिति बनाकर अपने पैतृक जिला बांदा की एजेंसी के प्रपत्रों की जांच किए बिना चयन करके अनुबंध कराया। चयनित एजेंसी के कंपनी प्रोफाइल में सुरक्षा कार्य के लिए न तो पंजीकरण है न ही कहीं दर्शाया गया है। एजेंसी गैस, बिजली तथा पानी कंपनी के लिए पंजीकृत है। एजेंसी का संचालक विनयाधिकारी के जिले का है तथा उसका एरिया मैनेजर कुलपति के सचिव का रिश्तेदार है। अनुबंधित एजेंसी उत्तर प्रदेश लघु उद्योग काॅरपोरेशन लिमिटेड से निष्कासित है और काली सूची में भी दर्ज है। आचार संहिता लगने के बाद किसी भी प्रकार की टेंडर प्रक्रिया नहीं की जाती है, लेकिन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 16 मार्च को आचार संहिता लगने के बाद 20 मार्च को बिना कार्यादेश जारी हुए ही अनुबंध करा दिया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में विनयाधिकारी, कुलपति के सचिव और कुलसचिव कार्यालय के बाबू की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
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