वाराणसी। बाबू जगत सिंह के मामले में सारनाथ शिलापट्ट पर अंकित तथ्यों को दुरुस्त किया जाए। सारनाथ के उत्खनन का सर्वप्रथम श्रेय बाबू जगत सिंह को है। वह राजा चेत सिंह के दीवान नहीं थे। इस मामले में शहर के चार गाइड एसोसिएशन ने शनिवार को संयुक्त रूप से पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा।
शनिवार को गाइड एसोसिएशन की ओर से सौंपे पत्रक में कहा गया है कि शोध से प्रमाणित हो चुका है कि बाबू जगत सिंह काशीराज परिवार के सदस्य एवं जमींदार थे। उस वक्त राजा चेत सिंह के दीवान बाबू जगदेव सिंह थे और बाबू जगत सिंह ने 1787 से 1790 के बीच में सबसे पहले सारनाथ में उत्खनन किया था। पूर्व में सारनाथ में बाबू जगत सिंह स्तूप लिखा था, जिसे बाद में धर्मराजिका स्तूप लिखा गया। एसोसिएशन की ओर से रूपम श्रीवास्तव, उपनिदेशक पर्यटन राजेन्द्र कुमार रावत और संस्कृति अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव को पत्रक दिया गया। इस दौरान टूरिस्ट गाइड एसोसिएसन, अप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड्स संगठन, सारनाथ टूरिस्ट गाइड संगठन एवं इंक्रेडिबल टूरिस्ट फैसिलिटेटर संगठन की तरफ से पत्रक देने वालों में जैनेंद्र कुमार राय, राजेश्वर सिंह, राजेंद्र पांडेय एवं विक्रम मेहरोत्रा के साथ बाबू जगत सिंह के प्रतिनिधि के रूप में अशोक आनंद एवं डॉ. अरविन्द कुमार सिंह शामिल रहे।